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मौत सप्लाई कर रहे 2 ब्लड बैंक को ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम ने कराया बंद

गाज़ियाबाद। मरीजों को जिंदगी देने वाले ब्लड बैंक ही अब उनके लिए खतरा बन रहे हैं। पिछले दिनों ड्रग्स डिपार्टमेंट की छापेमारी में ऐसी ही लापरवाही देखने को मिली। ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम शिकायत मिलने के बाद वसुंधरा व नेहरूनगर में चल रहे 2 ब्लड बैंक पहुंची। इस दौरान वहां टेस्टेड व अनटेस्टेड ब्लड एक साथ रखा मिला। यही नहीं दोनों जगह न तो डॉक्टर थे और न ही इमरजेंसी पड़ने पर जरूरी दवाएं व अन्य संसाधन थे। टीम ने दोनों ब्लड बैंक को बंद करा दिया है और शासन को इनका लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति भेजी है। अधिकारियों का कहना है कि ये पता किया जा रहा है कि यहां से किस-किस ने ब्लड लिया है। अगर कोई पीड़ित मिलता है, तो उसके जरिये एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

ड्रग्स इंस्पेक्टर जुनाब अली और विवेक यादव ने बताया कि विभाग को लगातार शिकायत मिल रही थी कि वसुंधरा में संचालित भगवान बुद्धा चैरिटेबल ब्लड बैंक और नेहरू नगर राकेश मार्ग पर संचालित संगम चैरिटेबल ब्लड बैंक में नियमों को ताक पर रखकर ब्लड संग्रहण किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद 7 अप्रैल को वसुंधरा स्थित भगवान बुद्धा चैरिटेबल ब्लड बैंक पर छापा मारा गया। इस दौरान वहां टेस्टेड ब्लड के फ्रीज से 51 यूनिट ब्लड बरामद हुआ, जिसमें अनटेस्टेड ब्लड भी शामिल था। ब्लड बैंक में कोई डॉक्टर नहीं था। इसके अलावा एफेरेसिस रूम में ऑक्सीजन सिलिंडर, इमरजेंसी ड्रग्स भी नहीं मिले। स्टॉक रजिस्टर पर मेडिकल ऑफिसर के हस्ताक्षर भी नहीं थे। अफसरों ने बताया कि इसके बाद 9 अप्रैल को हमारी टीम राकेश मार्ग स्थित संगम चैरिटेबल ब्लड बैंक पहुंची। यहां भी टेस्टेड और अनटेस्टेड 80 यूनिट ब्लड एक साथ रखा मिला। इसके अलावा यहां भी वही कमियां मिलीं जो पहले वाले ब्लड बैंक में थीं। इन कमियों के बाद विभाग ने इन बैंकों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया। इनके लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति शासन से की गई है। दोनों सेंटर से मिले ब्लड को नष्ट कर दिया गया है।

ब्लड बैंक की निगरानी ड्रग्स विभाग करता है। इसके अलावा जनपद के सरकारी ब्लड बैंक के प्रभारी भी ब्लड बैंक के स्टॉक की जांच करते हैं। भगवान बुद्धा चैरिटेबल ब्लड बैंक अक्टूबर 2016 से चल रहा था, जबकि संगम चैरिटेबल ब्लड बैंक फरवरी 2017 से चल रहा था। इस दौरान दोनों ब्लड बैंकों की नियमित जांच नहीं की गई। ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली ने बताया कि जून 2017 में दोनों ब्लड बैंक की ओर से लगाए गए डोनेशन कैंप में लापरवही बरते जाने पर कैंप को निरस्त किया गया था और उन्हें चेतावनी दी गई थी। इसके बाद दोनों ड्रग्स विभाग और प्रशासन के खिलाफ हाईकोर्ट चल गए थे। यह मामला अदालत में विचाराधीन है, जिसके कारण दोनों ब्लड बैंक की नियमित जांच नहीं हो सकी थी।

मेरठ मंडल के हायक आयुक्त ड्रग्स राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि ब्लड बैंक की जांच साल में एक बार की जाती है। इसके अलावा शिकायत मिलने पर भी जांच की जाती है। दोनों ब्लड बैंकों को लेकर शिकायत मिली थी, जिसके बाद छापेमारी की कार्रवाई की गई। दोनों बैंकों का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।

 

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