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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है संविधान के खिलाफ – सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने आज केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को लेकर बहुत सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि महिलाओं का मंदिर के अंदर ना जाना संविधान के खिलाफ है। इस मामले पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिनतोन फाली निरमन, एम खानविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदू मल्होत्री की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। जस्टिस दीपक मिश्रा ने महिलाओं के मंदिर के अंदर प्रवेश करने का समर्थन करते हुए कहा कि किस आधार पर मंदिर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी हुई है।

मुख्य न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि मंदिर एक सार्वजनिक संपत्ति है जहां कोई भी आ सकता है, अगर यहां किसी को भी आने की अनुमति है तो फिर महिलाओं को क्यों नहीं? संविधान में पुरुषों और महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है, ऐसे में मंदिर के अंदर महिलाओं के प्रवेश ना करने देना संविधान के खिलाफ है। बता दें कि 2015 में केरल सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था, लेकिन 2017 में उसने भी अपना रुख बदल दिया था। उस समय केरल के मंत्री कड़कमपल्ली सुरेंद्रन ने यहां संवाददाताओं से कहा था सबरीमाला मंदिर का प्रशासन त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीपी) के हाथ में है और इसकी परंपराएं और नियम हर किसी पर लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का मामला उच्चतम न्यायालय में पहले से चल रहा है। न्यायालय के फैसले से पहले परंपराओं और रीति रिवाजों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

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