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ट्रांसहिंडन में गैस रिफिलिंग का गोरखधंधा तेजी पर, अधिकारी मौन

गाज़ियाबाद। ट्रांसहिंडन में गैस रिफिलिंग का गोरखधंधा तेजी पर है। छोटे व बड़े रिफिल किए गए सिलेंडरों का इस्तेमाल सड़क किनारे लगने वाले खोखे से लेकर होटलों तक हो रहा है। वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली व साहिबाबाद में लगने वाले ठेलों पर जो सामान बेचा जा रहा है उसमें भी रिफिल किए गए सैकड़ों सिलेंडर इस्तेमाल हो रहे हैं। इन स्थानों पर रखे यह गैस सिलेंडर मिनी बम से कम नहीं हैं, जिनसे कभी भी हादसा हो सकता है। प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन से लेकर आपूर्ति विभाग सब मौन बैठे हुए हैं। इतना ही नहीं छोटे सिलेंडर में गैस भरकर 90 रुपये प्रति किलो के भाव से बेची जाती है। जबकि एजेंसी से मिलने वाले बिना सब्सिडी के सिलेंडर का दाम करीब सात सौ रुपये है। इसमें करीब 14 किलो गैस होती है।

छोटे होटल, ढाबे, चाय और छोले कुलचे की दुकानों पर ये सिलेंडर काम आते हैं। सर्द मौसम में बहुत से परिवार गैस गीजर का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें अवैध रूप से भरी गई गैस काम आती है। होटल, कॉलेज या बड़ी लॉन्ड्री में गैस आयरन का इस्तेमाल किया जाता है। वहां भी यही सिलेंडर काम आते हैं। शादी ब्याह, छोटे आयोजनों के लिए छोटे सिलेंडर भरकर बेचे जा रहे हैं। अलग-अलग स्थानों पर इस्तेमाल हो रहे छोटे गैस सिलेंडर या अवैध रूप से भरे गए गैस सिलेंडरों में आग लगने की संभावना अधिक रहती है। इन सिलेंडरों की गैस पिन जल्दी खराब और ढीली हो जाती है, जिससे कई बार गैस रिसने लगती है।

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