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कैंसर ने छीना मां और भाई को, अब मुफ्त में मरीजों को पहुंचा रहें हैं अस्पताल

नई दिल्ली त्रिपुरा के अगरतला की सड़कों पर ये ड्राइवर कैंसर के मरीजों को बगैर पैसे लिए ऑटो में बिठाता और अस्पताल पहुंचाता है। हममें से कितने ही लोग हैं जो जिंदगी में आई किसी त्रासदी के बाद एकदम टूट जाते हैं, खुद को अंधेरों में डुबो देते हैं लेकिन कई चेहरे ऐसे भी हैं जो तकलीफ को रौशनी का जरिया बना लेते हैं 44 साल के हर्षवर्धन महीने में 10 से 12 हजार रुपए ही कमा पाते हैं लेकिन इसके बावजूद कैंसर के मरीजों को फ्री राइड देते हैं उनसे बातचित करते हैं छोटे से सफर में जितना हो सके, उनके आंसू पोंछने की कोशिश करते हैं। 

हर्षवर्धन अपने पैरों पर खड़े ही हुए थे कि तब तक उनकी माँ का देहांत हो गया।  हर्षवर्धन जैसे-तैसे संभले ही थे कि तभी पता चला कि भाई को भी लिवर कैंसर है, भाई की तकलीफों को देख हर्षवर्धन को रातों को नींद नहीं आती थी। और कुछ ही दिनों बाद भाई की भी मृतु हो गई। भी की मृतु के बाद से हर्षवर्धन पूरी तरह टूट गया। तब उसने कैंसर के मरीजों के लिए कुछ करने की सोची, जिससे उसकी तकलीफें कम हो सके

तब हर्षवर्धन कारपेंटर हुआ करता था सरकारी लोन लेकर ऑटो खरीदा, उसपर कैंसर के खिलाफ जागरुकता संदेश लिखवाया और शहर की सड़कों पर उसे लेकर चलने लगा इस दौरान उसने सप्ताह के एक दिन कैंसर के मरीजों और उनके घरवालों को ऑटो में बिना पैसे लिए बिठाना शुरू किया उस छोटे से सफर के दौरान वह मरीजों से बात करते हैं, इसके साथ अपनी कहानी भी उन्हें सुनाते हैं ताकि बीड़ी-तंबाखू जैसी आदतों से वे दूर रहें

एक वक्त पर दिन की शुरुआत तंबाखू के करने वाले हर्षवर्धन अब अपनी तरह से कैंसर पर जागरुकता फैला रहे हैं इसके लिए उन्होंने अपनी आय के एकमात्र स्त्रोत यानी अपनी ऑटो पर संदेश लिखवाया है कई मरीजों से इतनी जान-पहचान हो गई है कि वे उनके साथ अस्पताल के चक्कर भी काट लेते हैं

मां की मौत के बाद से वह हर बुधवार को कैंसर के मरीजों को ऑटो में बिठाकर मुफ्त में अस्पताल पहुंचाते हैं लेकिन भाई की मौत के बाद से उन्होंने इसमें एक और दिन जोड़ दिया हालांकि लोगों को मुफ्त में लाने-छोड़ने के कारण परिवार चलाने में दिक्कत तो आती है लेकिन हर्षवर्धन और उसके परिवार ने मिल-जुलकर इसे संभाल लिया पत्नी सिलाई का काम करने लगी और हर्षवर्धन थोड़ी ज्यादा मेहनत। हर्षवर्धन ने अपने बेटे को भी कैंसर जागरुकता अभियान से जोड़ रखा है

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