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कठुआ गैंगरेप: दरिंदगी की हद पार करती इस घटना ने इंसानियत को किया शर्मसार

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में इसी साल जनवरी को 8 साल की बच्ची के साथ हुई बर्बरता ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इन्सान के वेश में घूम रहे हैवानों को पहचान पाना भी मुश्किल हो गया है। महिलाओं को देवी का दर्जा देने वाले भारत में बेटियों को ही नहीं बक्शा जा रहा है। मानवीय संवेदनाएं अब इस कदर गुम हो चुकी हैं कि अब बेटी को जन्म देना ही पाप सा लगने लगा है।

8 साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार के आरोपियों ने मानवता की सारे हदें पार कर दीं। गैंगरेप और हत्या के मामले में चार महीने बाद अब पुलिस ने 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस के अारोप पत्र में यह बताया गया है कि कैसे मासूम के साथ दरिंदगी की सारी हदे पार की गई हैं। इस वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी का नाम संजी राम बताया गया है। बकरवाल (एक मुस्लिम समुदाय) की इस मासूम बच्ची का अपहरण, रेप और मर्डर इलाके से इस अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी।

15 पन्नों की इस चार्जशीट में रासना गांव में देवीस्थान, मंदिर के सेवादार संजी को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। उसके साथ उसका बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा भी है। अन्य आरोपियों में विशेष पुलिस अफसर (SPOs) दीपक खजुरिया और सुरिंदर कुमार, रसाना का ही प्रवेश कुमार (मन्नू), असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता और हेड कांस्टेबल तिलक राज हैं। दत्ता और राज को सबूतों को नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच रिपोर्ट में सामने आया बच्ची को एक मंदिर में रखा गया। यहाँ उसे नशीली दवाएं दी गईं। इसका बाद मंदिर में ही हैवानों ने मासूम का गैंगरेप किया। इस घिनौने कृत में शामिल होने के लिए एक आरोपी मेरठ से अाया था। बच्ची जब मरणासन्न अवस्था में थी तो एक अन्य आरोपी पुलिसकर्मी ने कहा कि मैं एक बार और रेप करूँगा। इसके पहले बारी-बारी से हैवानों बच्ची का शरीर नोचा और उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। बच्ची का सिर कई बार पत्थर से मारा गया। मरने के बाद उसे जंगल मे फेंक दिया गया। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक रेप के आरोपी राम को बचाने के लिए पुलिस को 1.5 लाख रुपए भी दिए गए थे।

साजिश की शिकार हुई 8 साल की बच्ची के लिए एक बार फिर लोग सड़क पर उतरेंगे, भारतीय कानून को दुत्कारेंगे, उस बच्ची के प्रति संवेदना जताएँगे, लोक सभाओं में इस बच्ची को मुद्दा बनाकर बहस की जाएगी। लेकिन क्या ये सब करने से वो वापस आ जाएगी ? नहीं न। उस माँ का क्या जिसने उसे नौ महीने अपनी कोख में पाला, उस पिता का क्या जिसने उसे अपनी गोद में खिलाया, उसे चलना सिखाया। क्या अभी और महिलाओं, लड़कियों और नाबालिग बच्चियों की भेंट चढ़नी बाकी है ? आखिर कब भारत सरकार द्वारा इन बलात्कारियों के लिए कड़ा कानून बनाया जाएगा।

 

 

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