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व्हाट्सएप मिसाइलों से बचो और बचाओ

आज हमारे देश में जहां एक तरफ अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर लोग देश के टुकड़े करने के नारे दे रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ सरकारें वास्तविकता समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया पर रोज़ नयी-नयी बातें उछलवाने के आरोपों से घिरी खड़ी हैं। कहीं भी दंगा होने की स्थिति में अफवाहों को रोकने के लिए आज सबसे पहले उस क्षेत्र की इन्टरनेट सेवाओं को बंद कर सोशल मीडिया के उपयोग को रोकना ज़रूरी समझा जाता है। यानि सोशल मीडिया पर भेजे जाने वाले मैसेज आज एक बहुत बड़ी ताकत बन गए हैं। इस ताकत के सही इस्तेमाल से लाखों करोड़ों लोगों को शिक्षित और जागरूक नागरिक बनाने का काम किया जा सकता है, तो वहीं बहुत कम समय में लोगों की भावना भड़का कर हिंसक भीड़ बनाने का काम भी सोशल मीडिया के द्वारा ही किया जा सकता है।

ये तो जगजाहिर है कि किसी भी आन्दोलन और बंद से फैली हिंसा से सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का ही होता है और फायदा केवल जनता को भड़काने वाले नेताओं का। इसलिए अपना नुकसान रोकने के लिए हमें ही कुछ करना होगा। हमें थोड़ी सी समझदारी से काम लेना होगा। हम में से हर एक को कुछ नई आदतें बनानी होंगी। विद्वानों ने कहा है कि बोलने से पहले 3 बातों की जांच कर लेना बहुत जरूरी होता है – पहली जांच कि जो मैं बोल रहा हूँ क्या वह सत्य है? क्या ये बोलना ज़रूरी है? और क्या मेरे बोल विनम्रता पूर्ण हैं ? आज यही बातें व्हाट्सएप पर फॉरवार्ड किये जाने वाले संदेशों के बारे में भी लागू होती है। मैसेज किसी एक व्यक्ति को फॉरवार्ड किया जाए या किसी ग्रुप में शेयर किया जाए उसे इन्हीं कसौटियों पर परख कर ही आगे भेजना चाहिए।

सोशल मीडिया और किसी भी मीडियम से आई खबर पर आँख मूँद कर विश्वास करने का ज़माना अब गया। अब तो ये मान कर चलना ही उचित है कि खबर झूठी भी हो सकती है। इसलिए किसी भी मैसेज को पढ़कर उसे आगे ना भेजिए बल्कि अन्य स्रोतों से उस सन्देश की सच्चाई जान लीजिये। नेट पर विश्वसनीय साइट्स से पुष्टि कर लेने के बाद ही किसी मैसेज को आगे फॉरवर्ड करना अपनी आदत में शुमार कर लीजिये। इस तरह से आप अनजाने में भ्रम और अफवाहें फैलाने के पाप से बचे रह सकेंगे। आप का अपना मन शांत रहेगा और आप की सोच भी सही बनी रहेगी। मैसेज भेजने के पहले नियम यानि यह ”मैसेज सच और सही है” का पालन किया जाना आज बहुत ज़रूरी हो गया है।

दूसरा नियम यानी ”ये मैसेज आगे भेजा जाना ज़रूरी है क्या” के बारे में कुछ करने से ज्यादा ये समझने की ज़रूरत है कि हर आदमी के अनेकों मित्र और परिचित हैं जो उसे दिन रात इसी तरह के मैसेज भेजने में लगे हैं। आज हर एक आदमी बहुत से ग्रुप्स से जुड़ा होता है इस लिए एक ही मैसेज हमें कई-कई बार मिलता रहता है। लिहाजा आप नहीं भी भेजेंगे तो भी अभीष्ट मैसेज आप के परिचित तक पहुँच ही जाएगा। और सब से अच्छा तो ये रहे कि जिस सन्देश की प्रामाणिकता को लेकर आप आश्वस्त नहीं हैं, कम से कम वह मैसेज तो कतई आगे ना भेजिए। इस के लिए एक बहुत अच्छा अभ्यास ये क्या जा सकता है कि प्रतिदिन आप स्वयं अपना कोई अनुभव, शिकायत या सुझाव लिखने की कोशिश करें। ऐसा करने से आप समाज में अपना योगदान दे पायेंगे और ऐसा करके आप को बहुत संतुष्टि मिलेगी।

बोलने और मैसेज आगे भेजने का अंतिम नियम है कि आप के मैसेज में जो बात कही गयी है वह विनम्रता पूर्वक कही गयी है या नहीं। इस का ये भी मतलब है की आपके द्वारा फॉरवर्ड किया जा रहा मैसेज किसी प्रकार की नफरत या अलगाव को तो बढ़ावा नहीं दे रहा? ये लोगों की भावनाएं भड़काने वाला मैसेज़ तो नहीं है ? यदि हम मैसेज की ताकत को समझना शुरू कर दें, तो फिर हम इसका प्रयोग बड़ी सावधानी से करेंगे और यही आज की जरूरत भी है। कुल मिलाकर एक जागरूक और ज़िम्मेदार नागरिक बन कर सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करना भी देशभक्ति ही कहलाएगा।

आपका अपना,
अनिल गुप्ता