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कचरा समाधान महोत्सव खत्म, अब करें आगे की बात

तीन दिन चले कचरा समाधान महोत्सव में शहर के सैकड़ों बच्चों, समाज सेवियों, उद्यमी बंधुओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। जिला प्रशासन और खास तौर से हमारी कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार जिलाधिकारी इस सफल आयोजन के लिए बधाई और साधुवाद की पात्र हैं। आशा करता हूँ कि अब इस महोत्सव के बाद शहर और शहर वासियों में बहुत फर्क आयेगा। शहर के लोग सोचना शुरू करेंगे कि कैसे कचरा कम से कम पैदा हो, अपने स्तर पर ही इस कचरे के बड़े भाग को खाद और अन्य काम की चीज़ों में कैसे रूपांतरित किया जाए और शहर को कचरा और गंदगी से कैसे मुक्त रखा जाए। मैं यह भी उम्मीद करता हूँ कि इस आयोजन में जिन समाज सेवियों ने आगे बढ़ कर जिलाधिकारी और सांसद के साथ खूब फोटो खिचवाये थे, वे सभी कचरे के समाधान के लिए आगे भी काम करेंगे। आप जानते ही हैं कि शहर में ऐसे समाजसेवियों की एक बहुत बड़ी ज़मात है जो बड़े सरकारी अफसरों और प्रभावशाली नेताओं के साथ दिखने और छपने का कोई मौक़ा नहीं चूकते। जबकि वास्तव में समाज का भला करते हुए उन्हें शायद ही किसी ने देखा हो। ये तथाकथित समाजसेवी और छदम नेता ऐसे आयोजनों में भागीदारी ही शायद इसलिए करते हैं कि बड़े अधिकारियों और नेताओं को अपना बहुत ही खास या पारिवारिक मित्र बता कर आम जन को प्रभावित किया जा सके।

बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि कोई भी अच्छा काम खुद से और अपने घर से शुरू करना चाहिए इसलिए मुझे ये भी आशा है कि अब शीघ्र ही जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन और एसएसपी ऑफिस में बने सभी शौचालय नियमित रूप से साफ़ सुथरे रखे जायेंगे और इन सरकारी कार्यालयों के परिसर अब कचरा व गंदगी से मुक्त रहा करेंगे। वर्तमान में अधिकांश सरकारी बिल्डिंग और उनके परिसर स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगाते नज़र आते हैं और इसी लिए मैंने ये उम्मीद भी बाँधी है कि ऐसे सभी प्रशासनिक कार्यालय अब गंदे नहीं रहेंगे। इसी क्रम में नगर निगम से भी मैं आशा करता हूँ कि निगम कूड़ा ढोने के लिए खुली गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं करेगा और निगम की गाड़ियां अब शहर की सड़कों पर कूड़ा फैलाती नज़र नहीं आएंगी। अब से शहर के नालों को भी मलबा और कचरा मुक्त बना कर बह सकने योग्य बना दिया जाएगा।

बात कचरे की चल ही रही है तो लगे हाथों उस कचरे की भी बात कर ली जाए जो हम लोगों के दिमाग और सोच में भरा पड़ा है। हम आम लोग अपने आपसी झगड़ों और बेकार की मांगो में ही प्रशासन को इतना उलझाए रखते हैं कि अफसरों को हर दम फायर फाइटिंग मोड में ही रहना पड़ता है। हम अनुशासित हों, अच्छे नागरिक बन कर रहें तो प्रशासन भी अपना काम सही से कर सके। जिलाधिकारी, एसएसपी या फिर अन्य कोई प्रशासनिक अधिकारी अपनी योग्यता के बल पर सरकारी सेवा में आता है और उसके मन में भी अपने देश और देशवासियों के लिए काम करने का ज़ज्बा होता है लेकिन जब वो देखता है कि यहाँ हमारे समाज में ज़्यादातर लोग स्वार्थी, कायर और अवसरवादी हैं, वो केवल पैसे वालों की या प्रभावशाली लोगों की ही इज्ज़त करते हैं और अच्छे आदर्शों और मूल्यों की यहाँ कोई पूछ नहीं तो फिर अधिकारी भी उसी रंग में ढल जाता है। कचरा महोत्सव को वास्तव में सफल बनाने के लिए हमें हर रोज़ इस आयोजन के उद्देश्य को पूरा करना होगा। इसलिए आओ हम सब मिलकर काम करें और एक कचरा मुक्त शहर बनाएं।

आपका अपना
अनिल कुमार

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