ताज़ा खबर :
prev next

जानिये घूकना के प्राथमिक स्कूल का सूरते हाल

गाज़ियाबाद। अपने जिले में अधिकाँश प्राथमिक स्कूलों की हालत बहुत दयनीय है। टीचरों की कमी से लेकर शौचालय जैसी अति आवश्यक सुविधाओं से भी ये स्कूल वंचित हैं। घूकना क्षेत्र अंतर्गत नौबत सिंह त्यागी बेसिक परिषदीय प्राथमिक विद्यालय के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं । इस स्कूल की प्रिंसिपल संतोष देवी हैं व इनके साथ दो टीचर व एक शिक्षामित्र हैं। इन्हीं चार शिक्षिकाओं पर स्कूल का पूरा कार्यभार है।

कुल 311 विद्यार्थियों के इस स्कूल में 152 छात्र व 159 छात्राएं हैं। इस स्कूल में 5वीं कक्षा तक ही पढ़ाई होती है। स्कूल में 6 कमरे व 2 शौचालय है। कोई सफाई कर्मचारी नहीं होने के कारण शौचालय व स्कूल की सफाई चौथी और पांचवी कक्षा के विद्यार्थियों को करना पड़ता है। स्कूल में मिड डे मील के लिए 3 लोगों को रखा गया है। जिसका वेतन सरकार वहन करती है लेकिन कई बार वेतन समय पर नहीं आने के कारण सहायक संस्थानों की सहायता से इन्हें वेतन दिया जाता है। वहीं कई बार भोजन बनाने वाले लोग ही गायब हो जाते हैं जिस वजह से स्कूल के बच्चों को ही भोजन बनाना पड़ता है जिससे उनकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।

     

प्रशासन द्वारा सुविधा उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण सामाजिक संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले फंड की सहायता से स्कूल का कार्यभार चलता है। स्कूल में बच्चों के लिए डेस्क नहीं है जिसके कारण कडकडाती ठंड में भी इन्हें जमीन पर पट्टी बिछाकर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। टीचरों की कमी से जूझ रहा यह स्कूल बच्चों के भविष्य को कैसे संवार पायेगा ये अपने आप में सोचने का विषय है। इस स्कूल की प्रिंसिपल का कहना है कि स्कूल में 311 बच्चे पढ़ते हैं जिसके लिए 8 अध्यापकों की आवश्यकता है लेकिन आज के दिन कुल 4 टीचर ही उपलब्ध हैं । केवल इतना ही नहीं इनकी भी ड्यूटी कभी मतगणना, किसी सर्वे, पल्स पोलियो अभियान व बी एलओ आदि के साथ लगा दी जाती है जिससे ये बच्चों को पढ़ा नहीं पाती हैं।  शासन को कई बार लिखित पत्र देकर स्टाफ की मांग की गई है लेकिन अभी तक नए स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गयी है।

इस स्कूल में पेरेंट्स टीचर  मीटिंग गत वर्ष से शुरु की गयी है लेकिन अभी तक दो बार ही मीटिंग कराई गयी है। पेरेंट्स मीटिंग करवाने के लिए बीएसए ऑफिस से सूचना आती हैं की मीटिंग कब करनी है। प्रत्येक महीने की 3 तारीख को एक कमेटी की बैठक होती है जिसमे सभासद, अध्यक्ष, लेखपाल व एएनएम आदि उपस्थित होकर एक मीटिंग का आयोजन किया जाता है। इस बैठक में शिक्षा स्तर से सम्बंधित सवाल जवाब अपनी बातों रखा जाता है,समस्या का निदान किया जाता है। लेकिन लेखपाल व एएनएम की उपस्थिति के कारण यह बैठक भी नहीं हो पाती है। 

 

यदि प्राथमिक विद्यालयों के हालात ऐसी ही रही तो यहाँ पढने वाले बच्चों से कैसे देश के विकास की उम्मीद कर सकते हैं ? सरकार के कानों तक आवाज़ पहुँचाने में ना जाने कितना समय लग जाए इस लिए हम शहर के समाज सेवियों से अपील करते हैं कि वो अपने स्तर से ऐसे स्कूलों की मदद करने के लिए ज़रूर आगे आयें ।     

 

 

आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो भी कर सकते हैं।