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बुरे हाल है ये सरकारी प्राइमरी स्कूल

गाज़ियाबाद। शिक्षा बच्चों का सबसे पहला अधिकार है। देश के पूर्ण विकास के लिए आवश्यक है कि बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर सही तरीके से ध्यान दिया जाए। इसी लिए हम अपने शहर के सरकारी स्कूलों की रिपोर्टिंग कर उनका हाल आपके सामने रख रहे हैं। आज हम आपको जिले के लाल कुआं स्थित प्राथमिक विद्यालय के बारे में बताएंगे। इस स्कूल की प्रिंसिपल कान्ता यादव व शिक्षा मित्र बबिता  देवी हैं। स्कूल का सारा कार्यभार इन दोनों पर ही टिका हुआ है।

स्कूल की स्थिति –

कुल 163 विद्यार्थियों के इस स्कूल में 75 बालक व 88 बालिकाएं हैं। स्कूल में 7 कमरे व 4 शौचालय हैं। शौचालय की साफ़-सफाई के लिए सफाई कर्मचारी नहीं होने के कारण चौथी व पांचवी कक्षा के छात्रों से इसकी सफाई करवाई जाती है। लेकिन कभी-कभी ये भी नहीं हो पाता तो शौचालय गन्दा रह जाता है। स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को स्कूल के बाहर लगे हैंडपंप से पानी लाकर काम चलाना पड़ता है।

                                       

 

इस स्कूल में पिछले तीन महीने से सरकार द्वारा दी जाने वाली खाद्य सामग्री नहीं आ रही है जब कि स्कूल में मिड डे मिल के लिए अलग किचन की व्यवस्था है । विगत तीन महीने से बच्चों को घर से ही अपना लंच लाना पड़ता है। स्कूल में बच्चों के लिए डेस्क भी नहीं है जिससे बच्चों को हर मौसम में फर्श पर टाट पट्टी पर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। स्कूल में न तो बिजली कनेक्शन है और न ही पंखे स्कूल में बाउंड्री भी नहीं है इसलिए आवारा कुत्ते और पालतू जानवर स्कूल परिसर में आ जाते हैं। स्कूल पहुँचाने के लिए कोई पक्की सड़क भी नहीं है। जिस वजह से बरसात के मौसम में इन्हें कीचड भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है।

क्या है स्कूल की प्रिंसिपल का कहना –

हमारा गाज़ियाबाद की टीम द्वारा पूछने पर स्कूल प्रिंसपल ने बताया कि इन्हें वेतन भी 4 से 5 महीने के बाद मिल पाता है । कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा स्कूल को फंड भी मिलता है लेकिन वह भी स्कूल में सुविधाओं की पूर्ति नहीं करा पाता। उन्होंने बताया कि बच्चों की संख्या बढ़ने, नया सत्र शुरु होने व स्टाफ की कमी होने के कारण इन्हें परेशानी होती है। कभी-कभी इनकी ड्यूटी मतगणना, सर्वे, पल्स पोलियो अभियान व बीएलओ आदि में लगा दी जाती है जिससे ये बच्चों को नहीं पढ़ा पाती हैं।

                                        

स्कूल के आस-पास भरी गंदगी बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। इसकी सूचना शासन को लिखित पत्र के माध्यम से पूर्व में दी गयी थी लेकिन आज तक समस्या का निस्तारण नहीं हुआ है। इस स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग गत वर्ष से शुरु की गयी है। लेकिन अभी तक दो बार ही मीटिंग कराई गयी है। पेरेंट्स मीटिंग करवाने के लिए बीएसए ऑफिस से सूचना आती है कि मीटिंग कब करनी है। स्कूल मेनेजमेंट कमिटी के अध्यक्ष राकेश कुमार (पैरेंट्स), सभासद वेद पाल (बमेह्टा), लेखपाल, एएनएम तृप्ति द्वारा मीटिंग प्रत्येक माह की 2 तारीख को रखी गयी है। जिसमे कोई भी नहीं आता। स्कूल की प्रिंसिपल ने एक जूनियर हाई स्कूल मांग पर जोर डालते हुए कहा कि इस क्षेत्र के बच्चों की संख्या अधिक होने की वजह से शासन स्कूल में कक्षा बढ़वाने की मांग रखी है क्योंकि इस स्कूल से जो बच्चा प्राइमरी कक्षा पास कर लेता है उसे आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

प्रशासन का पक्ष :

इन समस्याओं के संबंध में गाजियाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विनय कुमार कहना है कि स्कूल के कमरों की पेंटिंग व फर्नीचर आदि के लिए टेंडर दे दिया गया है। इन सभी समस्याओं का समाधान जून तक कर दिया जाएगा। शिक्षकों की कमी के बारे में बीएसए ने बताया कि वर्ष 2010 से अभी तक शासन ने ग्रामीण स्तर पर नई नियुक्तियाँ नहीं की हैं। इस संबंध में शिक्षा निदेशक लखनऊ को लिखित पत्र में शिक्षकों की मांग की गयी है। स्कूल की सफाई को लेकर उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति का कोई प्रावधान या नियम नहीं हैं। स्कूलों की साफ़-सफाई का जिम्मा नगर निगम को सौंपा गया है। अगर स्कूलों की सफाई नहीं हो रही है तो वे इस सम्बन्ध में नगर आयुक्त से बात करेंगे।

 

 

आप कैसे कर सकते हैं मदद :

घर में किसी का जन्मदिन हो, किसी की पूण्यतिथि या आपमें किसी की मदद की भावना हो तो आप इस स्कूल में जाकर इनकी मदद कर सकते हैं। अगर आप इस स्कूल की मदद करना चाहते हैं तो आप हमें इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं (हमारा गाज़ियाबाद न्यूज़, 9650358408) ।

 

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