ताज़ा खबर :
prev next

गर्मी की छुट्टियों में बच्चों में जगाएं बड़े व बुजुर्गों के लिए सम्मान

नई दिल्ली। कॉम्पटिशन के इस दौर में माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर तो चिंतित रहते ही हैं, साथ ही एक्ट्रा कैलिकुलर एक्टिविटी और अच्छे गुण भी बच्चा सीखे इस बात पर भी अभिभावकों का खासा ध्यान होता है। अब तो गर्मी की छुट्टियां भी शुरू होने जा रही हैं। बच्चों के विकास के लिए गर्मियों की छुट्टियों में स्कूल समर कैंप के जरिए बच्चों को व्यस्त रखने और कुछ नया सिखाने की कोशिश करते रहते है। कई बच्चे परिवार के साथ विभिन्न शहरों में घूमने फिरने में छुट्टियों का आनंद लेते है। लेकिन यदि आप चाहे तो अपने बच्चों घर पर ही रहकर इन छुट्टियों का अच्छे से उपयोग करके उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर सकते है।

सबसे पहले ये समझना बेहद जरूरी है कि आपके बच्चे की रुची किस काम में है वो किस तरह की एक्टिविटी करने में सबसे ज्यादा सहज महसूस करते है। दूसरी बात ये है कि, बच्चे के पास जब इस बारे में बात करने के लिए जाए तो एक विकल्प ना लेकर जाए कम से कम 6 से 7 विकल्प रखे और उनके फायदे का बारे में उन्हें अच्छे से समझाएं। अगर बच्चे को संगीत सीखने में रुची है तो उसको म्यूजिक क्लासेज भेज सकते है। ऐसी क्लासेज में बच्चा अलग अलग तरीके के संगीत बजाना और गीत गाना सीख सकते है। अगर बच्चे को एक्टिंग में रुची है तो आप उसे थियेटर क्लासेज भेज सकते है। ऐसी बहुत सी क्लासेज है जो नाटकीय माध्यम से बहुत बच्चों को जागरूक करती है।

छोटी सी उम्र में अगर बच्चे तैरना सीखते है तो उनकी शारीरिक विकास काफी अच्छा हो सकता है। इसलिए बच्चे को गर्मियों के लिए स्वमिंग सीखाएं। बच्चे को नई भाषा सीखाएं  उससे ना उसका ज्ञान बढ़ेगा बल्कि उसमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। बच्चों को ड्राइंग, पेंटिंग आदि सीखाएं। बच्चे को पर्यावरण से जोड़ने के लिए उसे गार्डनिंग सिखाएं इससे वो पर्यावरण की ओर जिम्मेदार बनेगा।

इसके साथ ही नई तकनीकियों के अलावा बच्चों को घर के बुजुर्गों से कहानिया, किस्से और ऐतिहासिक घटनाएं जानने के लिए उत्सुक कराएं।क्योंकि भारतीय समाज में बुजुर्गों का हमेशा एक सम्मानीय स्थान रहा है। एक मार्गदर्शक और पारिवारिक मुखिया होने के नाते जो सम्मान बुजुर्गों को मिलता था, उसमे धीरे धीरे कमी आ रही है। उनके अनुभव को अमूल्य पूंजी समझने वाला समाज अब इनके प्रति बुरा बर्ताव भी करने लगा है। यह कहीं न कहीं माता-पिता के बच्चों को बचपन में न समझाने का ही नतीजा होता है। यदि आप आज से ही बच्चों में बड़े व बुजुर्गों (घर में दादा-दादी, नाना-नानी आदि) के प्रति आदर व सम्मान की भावना जगाएं तो बड़े होने पर समाज में उसकी अच्छी छवि नजर आएगी और साथ ही आपको उसके अभिभावक होने पर नाज होगा।

हमारा न्यूज़ चैनल सबस्क्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Follow us on Facebook http://facebook.com/HamaraGhaziabad
Follow us on Twitter http://twitter.com/HamaraGhaziabad

Subscribe to our News Channel