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आईएसआई को खुफिया सूचना देने वाली पूर्व डिप्‍लोमेट माधुरी गुप्‍ता को 3 साल की कैद

नई दिल्ली। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय सूचनाएं देने के जुर्म में दिल्ली की एडीशनल सेशन कोर्ट ने पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता को तीन साल जेल की सजा सुनाई है। इससे पहले शुक्रवार को कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए कहा था कि उन्होंने ईमेल से संवेदनशील सूचनाएं लीक कीं, जो दुश्मन देश के लिए उपयोगी हो सकती हैं। यह मामला आठ साल पुराना है, तब माधुरी इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त में सेकंड सेक्रेटरी (प्रेस एवं सूचना) के पद पर तैनात थीं।

जम्मू-कश्मीर के हाईड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सूचनाएं देने का था वादा

जांच में सामने आया कि माधुरी ने आईएसआई के अफसरों से जम्मू-कश्मीर के एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की जानकारी देने का वादा किया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह दुश्मन देश को मदद करने की उनकी मंशा को दर्शाता है।

छह महीने तक देती रहीं सूचनाएं

जांच में यह बात भी सामने आई कि माधुरी कंप्यूटर और ब्लैकबेरी फोन के जरिए आईएसआई एजेंट मुबशर रजा राणा और जमशेद के संपर्क में थीं। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने अक्टूबर 2009 से अप्रैल 2010 के बीच आईएसआई हैंडलर को संवेदनशील सूचनाएं दीं।

कोर्ट ने कहा- पढ़ी-लिखी महिला उदारता के लायक नहीं

जज सिद्धार्थ शर्मा की कोर्ट ने कहा, “कानून के तहत संरक्षित जानकारी को गलत तरीके से मुहैया कराया गया है। एक पढ़ी-लिखी महिला किसी भी उदारता के लायक नहीं है।” कोर्ट ने कहा कि उनकी हरकत देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकती थी। कोर्ट ने सजा सुनाने के बाद उन्हें इस आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए जमानत दे दी।

2010 में हुई थी माधुरी की गिरफ्तारी