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मेरठ- एसएसपी ने डाक्टरों को दिया सुरक्षा का भरोसा

मेरठ। शहर में आए दिन डाक्टर और मरीज के बीच विवाद की घटनाओं को प्रशासन ने संजीदगी से लिया है। जिलाधिकारी अनिल ढींगरा एवं एसएसपी राजेश पांडे ने सोमवार को चिकित्सकों के साथ तमाम मुद्दों पर चर्चा की। भरोसा दिया कि चिकित्सकों के साथ कोई अन्याय नहीं होने पाएगा। नर्सिग होम एवं अस्पतालों में मारपीट एवं तोड़फोड़ बंद होगी।

डाक्टरों ने भी शहर में ताबड़तोड़ खुल रहे अस्पतालों, लैबों एवं आवारा एंबुलेंसों को चिकित्सा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। आइएमए अध्यक्ष डा. मेधावी तोमर ने शहर में चिकित्सकों की तमाम परेशानियों का जिक्र किया। कहा कि मरीज की मौत के बाद डाक्टरों को जिम्मेदार ठहराकर तोड़फोड़ कर दी जाती है। एसएसपी राजेश पांडे ने कहा कि मरीज की मौत के कारणों की सीएमओ की निगरानी वाली टीम जांच करेगी, जिसके बाद ही कोई रिपोर्ट दर्ज होगी। एसएसपी ने भरोसा दिया कि अगर कोई रंगदारी मांगता या धमकाता है तो चिकित्सक इसकी सिर्फ सूचना दर्ज करा दें। पूरी गंभीरता से संज्ञान लिया जाएगा। गत दिनों डा. शकील अहमद की क्लीनिक में हुई चोरी का भी जिक्र उठा। डा. अनिल नौशरान ने कहा कि प्रशासन ने स्वयं पहल करते हुए डाक्टरों की पीड़ा को जाना, जिससे बड़ी उम्मी बंधी है। डा. वीरोत्तम तोमर ने कहा कि माहौल बिगड़ने से ही रात में डाक्टरों ने रात में मरीज देखना कम कर दिया है। डा. एसएम शर्मा, डा. वीपी कटारिया, डा. रवि भगत, डा. ऋषि भाटिया, डा. शकील अहमद समेत कई अन्य शामिल हुए।

मूल रूप से अलीगढ़ जिले के गांव धर्मपुरा निवासी ब्रजपाल मेरठ छठीं वाहिनी पीएसी में दारोगा हैं। उनका परिवार शास्त्रीनगर में रहता था। तीन मार्च 2018 को उनकी पत्‍‌नी सुमन देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बेटा कविंद्र सिंह बचाव में आया तो उसे भी तीन गोली मार दी थी, लेकिन वह बच गया था। इस प्रकरण में शास्त्रीनगर निवासी अर्जुन राणा, शिवा राणा, शक्ति राणा, प्रताप सिंह, ओमपाल सिंह, जितेंद्र राणा को दारोगा ने नामजद कराया था। जबकि पुलिस की जांच में नीरज भाटी और नितिन का नाम जांच में सामने आया था। दारोगा का कहना है कि पुलिस ने खेल करते हुए प्रताप सिंह, ओमपाल, जितेंद्र राणा के नाम मुकदमे से निकाल दिए हैं। बाकी सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दे दी है। जिन तीन लोगों के नाम निकाले गए हैं। उनके बारे में इस केस के विवेचक एवं इंस्पेक्टर नौचंदी धीरज शुक्ला का कहना है कि वह जांच में बेकसूर पाए गए हैं। दारोगा की बहन सविता का पहले से एक मुकदमा चल रहा है। इन लोगों को फंसाने के लिए नाम लिखाए गए थे।

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