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देश और समाज के लिए युवाओं को प्रेरित कर सकें, यह एक शिक्षक का काम है

गाज़ियाबाद। मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में आयोजित वीर सावरकर जयंती समारोह में विद्यार्थियों ने देशभक्तिपूर्ण कविताओं, सम्भाषणों, समूह गान आदि प्रस्तुत किये। विद्यार्थियों के अलावा भावी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने वीर सावरकर के जीवन पर आधारित अनेक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर इंस्टीटृयूशंस के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि विद्यार्थी महापुरुषों के गुणों को आत्मसात करें। उनके आधार पर अपना जीवन ढालें और देश व समाज के लिए जीना सीखें। तभी हम सच्चे अर्थों में वीर सावरकर की जयंती मनाने में सफल हो पाएंगे।
उन्होंने कहा कि युवाओं को आज नौकरियां मिलें, यह तो जिंदगी का एक सफल मकसद हो सकता है मगर देश और समाज के लिए युवाओं को प्रेरित कर सकें, यह एक शिक्षक का काम है। मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस इसी भावना को मिशन के रूप में लेकर निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर मुस्लिम विरोधी कतई नहीं थे। वह 200 सबजातियों में बंटी हिन्दू संस्कृति के खिलाफ थे। इस संस्कृति को संगठित करना ही उनका मकसद था। उन्होंने कहा कि अपनी समस्या खुद ही हल करनी होगी।
डाॅ. गदिया ने वीर सावरकर के जीवन के अनेक संदर्भों को शब्दचित्र के जरिये रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यातनाएं सहने से कभी नहीं डरना चाहिए। यातनाएं सहने वाला लम्बी आयु जीता है। वीर सावरकर का जीवन इसका एक सशक्त उदाहरण है। उन्होंने एक रोचक संदर्भ से इस बात की पुष्टि की।
इससे पूर्व डाॅ. गदिया, मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल आदि ने वीर सावरकर, शारदे मां व भारत माता के चित्र के समक्ष दीप जलाया और पुष्प अर्पित कर अपनी भावांजलि दी। समारोह में हेमंत कुमार, श्वेता, शिवम गुप्ता, आभा सक्सेना, स्मिता एंड ग्रुप, विनय कुमार वर्मा, नीरज कुमार, कुंवर आदित्य विक्रम सिंह आदि विद्यार्थियों ने सम्भाषण, कविताएं, समूह गान आदि से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।