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भाई जी

हमारे मोहल्ले में एक सज्जन रहते हैं, उन्हें सब लोग भाई जी कह कर पुकारते हैं। छोटे बच्चे उन्हें बहुत पसंद करते हैं क्योंकि मोहल्ले का पार्क उन्हें की मेहनत से इतना हरा भरा बना है। पार्क में झूले और लाईट लगवाने के लिए भी उन्होंने बहुत मेहनत की है। अकसर उन्हें झूलों के कब्जों में तेल डालते हुए या उखड़ी हुई कोई टाइल फिर से बैठाते हुए देखा जा सकता है। सड़क की लाइटें खराब होने पर भाई जी ही उन्हें ठीक कराते हैं। कॉलोनी के बड़े बूढ़े उन्हें बहुत दुआएं देते हैं और कॉलोनी की बेटियाँ उनकी मौजूदगी में खुद को महफूज़ समझती हैं। गली और पार्क में किसी भी बाहरी को बिला वजह घूमते देख कर भाई जी उन्हें तुरंत टोकते हैं। घर में पूजा करने के लिए रोज़ मोहल्ले के पार्क में लगे फूल तोड़-तोड़ कर ले जाने वाले लोग भाई जी के टोकने से बहुत परेशान हैं। उधर पार्क को खेल का मैदान समझ कर फुटबॉल खेलने वाले बच्चे इन भाई जी से बहुत नाराज़ रहते हैं क्योंकि पार्क के पौधों को बचाने के लिए वे बच्चों को पार्क में खेलने से मना करते हैं।
भाई जी पार्क के मालियों के काम पर पूरी नजर रखने के साथ-साथ उनके सुख-दुःख का भी पूरा ध्यान रखते हैं। 140 से ज्यादा घरों की कॉलोनी के सब लोगों को वे अच्छे से पहचानते हैं। कॉलोनी की सुरक्षा में लगे चारों गार्ड्स की सेलरी के लिए वे घर-घर चन्दा लेने भी जाते हैं। भाई जी गजेटेड सरकारी ऑफिसर के पद से रिटायर हुए हैं, पर रिटायर होने से कई साल पहले से वे कॉलोनी में इसी तरह से सक्रिय हैं। हमारी कॉलोनी में हर साल भाई जी और उन्हीं की तरह के कई लोग मिलकर होली का आयोजन बड़ी धूम धाम से करते हैं। होलिका दहन होता है, प्रसाद बनता है और रंग वाले दिन सुबह से ही चाट पकौड़ी और ठंडाई चलती है। कॉलोनी के सब लोग मिलकर पार्क में होली मनाते हैं। दोपहर में 2 बजे से खाने का इंतजाम रहता है जिस में 700 से ज़्यादा लोग खाना खाते हैं। कॉलोनी के लोग मिलकर सारा खर्चा उठाते हैं और भाई जी शुरू से आखिर तक हर काम में खड़े दिखते हैं। भाई जी के दोनों बच्चे आस्ट्रेलिया में सैटल्ड हैं और यहाँ वे अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। हर किसी के सुख दुःख में भाई जी साथ खड़े होते हैं।
ऐसे भाई जी हर कॉलोनी में होते हैं तभी वहां के पार्क, सड़कें और स्ट्रीट लाइट्स ठीक रहती हैं। ऐसे भाई जी किसी पद या शौहरत के लिए काम नहीं करते। इन्हें किसी पुरस्कार की तमन्ना नहीं होती। ये भाई जी कॉलोनी के स्वघोषित कार्यकर्ता होते हैं। चंदे में फटे पुराने नोट देने वालों या चक्कर कटवा कर चन्दा देने वालों से भी ये हंस कर ही बात करते हैं। लोगों के चेहरों पर मुस्कान देख कर इनका खून बढ़ता है। सरकारी संपत्ति को ये बहुत सहेज के रखते हैं। व्यवस्था को बिगाड़ने वालों से भाई जी लड़ भी जाते हैं। समाज का भला हो, सड़क पर हर आदमी सुरक्षित रहे और बच्चों को एक बेहतर दुनिया दे कर जाएं बस ये इसी कोशिश में लगे रहते हैं और हाँ ये अपनी सेवा के बदले किसी राजनैतिक पार्टी के लिए वोट कभी नहीं मांगते।
इन भाई जी को आप ने भी अपने मौहल्ले या कॉलोनी में ज़रूर देखा होगा। नहीं देखा हो तो देखने की कोशिश कीजिये और पहचानिए। आप के और मेरे बच्चे भाई जी जैसे बने क्या आप ये नहीं चाहोगे? आज हर कॉलोनी में भाई जी जैसे लोगों की जरूरत है। कॉलोनी में चन्दा ना देने वाले या शिकायत करते रहने वाले पहले ही बहुत हैं इस लिए हमें हर भाई जी का सम्मान करना सीखना होगा। हमारे समाज के हर भाई जी को मैं दिल की गहराइयों से नमन करता हूँ और ये कामना करता हूँ कि हर कॉलोनी और मौहल्ले में ऐसे कई भाई जी हों।
आपका अपना,
अनिल कुमार