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रेल हादसे के नाम पर मुआवजा देने से दिल्ली हाईकोर्ट ने किया इनकार

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को मुआवजा देने से इनकार कर दिया जिसके परिवार के पांच सदस्य कथित तौर पर एक रेल दुर्घटना में मारे गए थे। व्यक्ति ने अपनी याचिका में दावा किया कि 13 जनवरी, 2010 को उसकी पत्नी, बेटे, बहू और दो पोते-पोती दिल्ली जाने के लिए फरीदाबाद के न्यू टाउन रेलवे स्टेशन से एक ईएमयू ट्रेन में सवार हुए थे और चालक के अचानक ब्रेक लगाने के कारण वह प्लेटफॉर्म की दूसरी तरफ ट्रेन से गिर गए थे।

इसमें आरोप लगाया कि एक मिनट बाद सामने से आ रही राजधानी ट्रेन ने पांचों को अपनी चपेट में ले लिया और सभी की मौत हो गई।अदालत ने कहा कि ऐसा पाया गया है कि पांचों मृतक ईएमयू ट्रेन के प्रमाणिक यात्री नहीं थे।

न्यायमूर्ति जेआर मिधा ने कहा, “अगर मान भी लिया जाए कि सभी पांच व्यक्ति ईएमयू ट्रेन में सफर कर रहे थे तब भी झटका लगने से सभी साथ नहीं गिर सकते। रेलवे स्टेशन पर झटका लगने की बात पर भी यकीन नहीं किया जा सकता क्योंकि प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों की गति धीमी होती है।” अदालत ने यह भी कहा कि मृतक बगल वाली पटरी पर नहीं गिर सकते जो कि आठ फुट दूरी पर थी और उस पटरी पर राजधानी ट्रेन तीन घंटे बाद आई।

रेलवे दावा अधिकरण के आदेश के खिलाफ दायर की गई इस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाएं गलत कथन के आधार पर दायर की गईं और किसी मुआवजे की हकदार नहीं हैं।

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