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बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसती है भारत की आत्मा – नागपुर में बोले प्रणव दा

नागपुर | पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आत्मा ‘बहुलतावाद एवं सहिष्णुता’ में बसती है। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हम भारतीय अपनी ताकत सहिष्णुता से प्राप्त करते हैं और बहुलवाद का सम्मान करते हैं। हम अपनी विविधता का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने प्राचीन भारत से लेकर देश के स्वतंत्रता आंदोलत तक के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्रवाद ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तथा ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:..’ जैसे विचारों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रवाद में विभिन्न विचारों का सम्मिलन हुआ है। उन्होंने कहा कि घृणा और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीयता कमजोर होती है। मुखर्जी ने राष्ट्र की अवधारणा को लेकर सुरेंद्र नाथ बनर्जी तथा बालगंगाधर तिलक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्रवाद किसी क्षेत्र, भाषा या धर्म विशेष के साथ बंधा हुआ नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए लोकतंत्र सबसे महत्वपूर्ण मार्गदशर्क है।

डॉ. मुखर्जी ने कहा कि हमारे राष्ट्रवाद का प्रवाह संविधान से होता है। ‘भारत की आत्मा बहुलतावाद एवं सहिष्णुता में बसती है।’ उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही लोगों की प्रसन्नता एवं खुशहाली को राजा की खुशहाली माना था। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने सार्वजनिक विमर्श को हिंसा से मुक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें शांति, सौहार्द्र और प्रसन्नता की ओर बढ़ना होगा। हमारे राष्ट्र को धर्म, हठधर्मिता या असहिष्णुता के माध्यम से परिभाषित करने का कोई भी प्रयास केवल हमारे अस्तित्व को ही कमजोर करेगा।

इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के संस्थापक सरसंघचालक केशव बलिराम हेडगेवार की जन्मस्थली पर गए और उन्होंने उन्हें भारत माता का महान सपूत बताया। मुखर्जी ने हेडगेवार की जन्मस्थली पर आंगुतक पुस्तिका में लिखा, ‘आज मैं भारत माता के महान सपूत को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने आया हूं।’ सूत्रों के अनुसार हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने से जुड़ी मुखर्जी की यह यात्रा उनके निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी और पूर्व राष्ट्रपति ने अचानक ऐसा करने का निर्णय लिया। इस मौके पर सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्य मौजूद थे जिन्हें विशेष अतिथि के रुप में निमंत्रित किया गया था।

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