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मदद तो दूर, बात तक नहीं करते हैं सरकारी कर्मचारी – नक्सली हमले में शहीद सिपाही की बेटी का छलका दर्द

रांची | सरकार भले ही नक्सली हमले में शहीद हुए पुलिसकर्मियों और सैनिकों के परिवारों को बड़ी-बड़ी सहायताओं की घोषणा करे मगर बरसों की रिश्वतख़ोरी के चलते सद चुके सरकारी सिस्टम की असलियत कुछ और है। इसमें कोई शक नहीं कि अपना हक मांगने के लिए आम जनता ही नहीं शहीदों के परिजनों को भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं।
वर्ष 2002 में नक्सली हमले में शहीद हुए छत्तीसगढ़ पुलिस के एक सिपाही कौशलेश सिंह की बेटी ने सरकारी बाबुओं की बेरुखी बयां की है। शहीद कौशलेश सिंह की बेटी मंजू का कहना है कि वो सरकारी अधिकारियों के पास मदद के लिए जाती हैं तो उन्हें बेइज्जती झेलनी पड़ती है। मंजू ने ये भी कहा कि वो अफसरों के पास मदद को गई तो उन्होंने धक्‍के मारकर न‍िकाल द‍िया। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शहीद की इस बेटी की आंखों से आंसूं निकल आए।
नक्सली हमले में अपने पिता को खो चुकीं मंजू का ने लोगों से अपील की है कि वो किसी भी हाल में नक्सलियों का साथ ना दें। बता दें कि शुक्रवार को ये खबर सामने आई कि माओवादियों मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रखी थी। एक लीक ईमेल से पता चला कि ये लोग ठीक वैसे ही पीएम मोदी की हत्या करना चाह रहे थे जिस तरह से लिट्टे ने पूर्व पीएम राजीव गांधी की की थी।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से ही लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए नक्सली हमले में शहीद पुलिस जवान की बेटी मंजू ने लोगों से नक्सलियों का साथ ना देने की अपील की। इसके साथ ही मंजू ने अपने साथ सरकारी अधिकारियों की बदसलूकी की दास्तां भी सुनाई।
शहीद कौशलेश सिंह की बेटी के साथ ही उनकी बेवा पत्नी कृष्णा ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। कृष्णा ने कहा कि नक्सली अच्छे आदमी को ही मारते हैं। पीएम अच्छे आदमी हैं। पता नहीं, उनको वो क्यों मारना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जिसको मारना है, नक्सली उसे नहीं मारते हैं। लेकिन अच्छे आदमी को जरूर मारते हैं। पुलिस-कर्मचारी सब अच्छे हैं। उसे मारते हैं।

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