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गोरा बच्चा बना भिखारिन की मुसीबत, बच्चा चोर समझ पब्लिक ने की पिटाई

गाज़ियाबाद | जहां एक ओर संचार क्रांति ने समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वहीं दूसरी ओर व्हाट्स एप और सोशल मीडिया पर उड़ती अफवाहों की वजह से आमजन के सोचने समझने की शक्ति में भी काफी कमी आई है। हालत यह है कि हम अब हर व्यक्ति को शक की निगाह से देखते हैं और जहां कहीं भी हमें अपने से कमजोर व्यक्ति मिलता है, हम उसे अपराधी मान लेते हैं जबकि हमारे सामने ही हमसे ज्यादा ताकतवर या असरदार व्यक्ति खुलेआम अपराध कर रहे हैं।

कुछ ऐसा ही हमारे गाज़ियाबाद में भी हुआ। मंगलवार रात को घंटाघर स्थित हनुमान मंदिर के पास लोगों ने भीख मांगने वाली सांवली महिला की गोद में गोरा बच्चा देखकर उसे चोर समझ लिया और बच्चे को छुड़ाने के लिए हंगामा कर दिया। थोड़ी ही देर में यहाँ लोगों की भीड़ जमा हो गई और बच्चा चुराने का आरोप लगाते हुए महिला की पिटाई कर दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया। यही नहीं भीड़तंत्र के सामने घुटने टेकते हुए पुलिस ने भी महिला को बच्चा चोरी के आरोप में बंद कर दिया। हालांकि बाद में हुई जांच में पता चला कि बच्चा महिला का ही है।

हुआ कुछ यूं कि घंटाघर स्थित हनुमान मंदिर के पास मंगलवार रात 11 बजे फटे-पुराने कपड़े पहने एक सांवली महिला खड़ी थी। उसकी गोद में दो माह का बच्चा था। बच्चा बहुत गोरा था और महिला की गतिविधियां भी लोगों को संदिग्ध लग रही थीं। ऐसे में लोगों ने महिला को बच्चा चोर समझ लिया। वहां मौजूद लोगों ने महिला को डरा-धमकाकर बच्चे के बारे में पूछा। महिला ने बच्चे को अपना बताया, मगर लोगों ने उसकी बात नहीं मानी।

भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने महिला की पिटाई भी कर दी। थोड़ी ही देर में मंदिर के पास हंगामा होने लगा। मामला बढ़ता देख पुलिस को इसकी सूचना दी गई। सूचना पर पहुंची पीआरवी ने मामला शांत कर महिला को जाने को कह दिया था। इस बात से स्थानीय लोग नाराज हो गए और हंगामा किया। लोगों का आरोप था पुलिस मामले को रफा-दफा कर रही थी। इस बात पर लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजे शुरू कर दी और दबाव में आकर पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया।

लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि वह मेरठ रोड पर झुग्गियों में रहती है। वह भीख मांगने घंटाघर मंदिर पर आई थी। थाना प्रभारी जयकरन सिंह ने बताया कि मेरठ रोड पर झुग्गी में रहने वाले महिला के परिजनों से पूछताछ की गई। लोगों ने बताया कि बच्चा उसी का है। इसलिए रात में ही हिरासत में ली गई महिला को परिजनों को सौंप दिया।

बाबूजी, क्या गरीब होना अपराध है?
पीड़ित महिला ने बताया कि अपने परिवार के साथ झुग्गियों में रहती है। वह मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को मंदिरों पर भीख मांगने जाती है। बच्चे को देखकर लोग अच्छी भीख दे देते हैं, इसलिए महिला दो माह के बच्चे को साथ लेकर चलती है। पब्लिक की पिटाई के कारण महिला को काफी चोटें आई हैं छिना झपटी में दो माह का दुधमुंहा बच्चा भी घायल हो गया है। पीड़ित महिला ने घटना का विवरण देते हुए कुछ ऐसे सवाल पूछे जिसका जवाब देना शायद समाज के बस की बात नहीं। महिला का कहना है कि क्या गरीब व्यक्ति हमेशा ही अपराधी होता है? क्या गरीब और साँवली महिला गोरे बच्चे को जन्म नहीं दे सकती है? ऐसा क्यों है कि कुंठित समाज का गुस्सा हमेशा अपने से कमजोर व्यक्ति पर ही निकलता है? ऐसा क्यों है कि पुलिस हमेशा ही भीड़ के सामने बौनी नज़र आती है? क्या निर्दोष महिला को पीटने और उसके दुधमुंहे बच्चे के साथ छीनाझपटी के आरोप में भीड़ पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? क्या उस भीड़ में कोई भी समझदार व्यक्ति मौजूद नहीं था? यदि हाँ, तो वह महिला की मदद को आगे क्यों नहीं आया? क्या पुलिस के बड़े अधिकारियों को पीआरवी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर भीड़ का साथ देने और निर्दोष महिला को हिरासत में लेने के आरोप में सजा नहीं मिलनी चाहिए?

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