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4 साल में पांच गुना बढ़ा विदेशी खरीद पर सेना का खर्च, 25 परियोजनाएं अधर में

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादों को तरजीह देने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अभी तक इसके तहत शुरू हुई योजनाओं के नतीजे सामने नहीं आए हैं। इसलिए सेना की रक्षा सामान खरीदने के मामले में विदेशों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। पिछले चार सालों में इसमें करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है।

रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में सेना के लिए पिछले चार सालों के दौरान हुई खरीद का ब्योरा जारी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार सेना को आवंटित पूंजीगत राशि के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल विदेशों से रक्षा साजो सामान की खरीदने पर किया गया। जिसमें गोला, बारूद, बंदूकें, टैंक आदि शामिल हैं।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2012-13 में विदेशी सामानों की खरीद पर पूंजीगत व्यय की राशि 988 करोड़ रुपये थी। लेकिन 2013-14 में यह राशि बढ़कर 1,592 करोड़, 2014-15 में 3,589 करोड़, 2015-16 में 3,006 करोड़ तथा 2016-17 में 5,284 करोड़ पहुंच गई। यानी चार साल में 500 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

बजट की कमी से लटकी 25 परियोजनाएं 
रिपोर्ट में सेना की तरफ से कहा गया है कि उसने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब तक 25 परियोजनाओं की पहचान की है। लेकिन इसके लिए बजट नहीं है। जिस कारण इन परियोजनाओं पर अभी तक आगे नहीं बढ़ा जा सकता है। हो सकता है कि इन्हें बंद ही करना पड़े।

रणनीतिक साझेदारी में उत्पादन की पहल 
सेना ने यह भी कहा कि सरकार ने रणनीतिक साझीदारी में रक्षा उपकरण देश में बनाने की एक नई पहल की है। इसमें विदेशी कंपनियों को कहा जा रहा है कि वह भारतीय साझेदारी में देश में अपना कारखाना लगाएं। इनमें बनने वाले उपकरणों की खरीद सरकार करेगी। सेना ने इस योजना के तहत भी कुछ परियोजनाओं की पहचान की है। लेकिन अभी तक कोई विदेशी साझीदार सामने नहीं आया है। सेना ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में देश में उपकरण बन सकेंगे या नहीं।

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