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फर्जीवाड़ा में इंजीनियरिंग कॉलेज के डीन, डिप्टी रजिस्ट्रार गिरफ्तार

गाज़ियाबाद। मसूरी पुलिस ने भगवती इंजीनियरिंग कॉलेज में करोड़ों की सरकारी छात्रवृत्ति हड़पने के मामले का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने चार साल से चल रहे इस खेल के मास्टर माइंड कॉलेज के डीन और डिप्टी रजिस्ट्रार को गिरफ्तार किया है। मसूरी थाने का कार्यभार देख रही प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी अर्पणा गौतम ने बताया कि कॉलेज में कार्यरत पूर्व का एक कर्मचारी दीपक शर्मा की शिकायत पर की गई जांच में कॉलेज के इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

पुलिस ने कॉलेज के दो पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में फर्जी मुहर, फार्म आदि बरामद किए। बरामदगी में सिंडिकेट बैंक के 521 पासबुक, कैनरा बैंक के 10 पासबुक, 94 स्कूलों, इंटर कॉलेजों के मुहर, दाखिले की 116 फाइल, छात्रवृति की 137 फार्म और 194 छात्र-छात्राओं के नाम की फर्जी टीसी फार्म बरामद किए किए गए।

सहायक पुलिस अधीक्षक अर्पणा ने बताया कि फर्जीवाड़े की शुरुआत फर्जी अंकपत्र, टीसी बनाकर की जाती थी। मास्टर माइंड संजीव सिंह अपने साथियों की मदद से इंटर कॉलेज की मुहर बनाकर पहले प्रमात्र पत्र, टीसी बनाकर भगवती कॉलेज के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला देता था। बीबीए, बीसीए, बीटेक, पीजीडीएम कोर्स के पहले वर्ष में 100 से करीब छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाया जाता था, फिर समाज कल्याण विभाग समेत अन्य विभागों में आवेदन करके छात्रवृत्ति का करोड़ों रुपये हड़प लेते थे।

भगवती इंजीनियरिंग कॉलेज में गौतमबुद्धनगर का रहने वाला पूर्व एक्जीक्यूटिव दीपक शर्मा पहले काम करता था। कॉलेज द्वारा उसका कई माह का वेतन करीब साढ़े तीन लाख रुपया नहीं दिया गया था। इसके बाद दीपक ने कॉलेज में वर्षों से चल रहे छात्रवृत्ति हड़पने के इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ कर दिया। सहायक पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दीपक की शिकायत पर मसूरी थाने में चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा लिखा गया। रिपोर्ट में कॉलेज निदेशक (मालिक) राकेश सिंघल, उनके दो बेटे हिमांश सिंघल और आयुष सिंघल निवासीगण कविनगर और डीन व एडमिशन हेड संजीव कुमार सिंह, निवासी घूकना, गाजियाबाद शामिल हैं।

कॉलेज के पूर्व कर्मी ने बताया कि हर वर्ष विभिन्न कोर्स में 100 से करीब फर्जी छात्रों का दाखिला दिखाया जाता था। वर्ष 2014-15 में 100 फर्जी दाखिले के बारे में उसे पता चला। इन छात्रों के नाम पर पहले वर्ष से अंतिम वर्ष तक समाज कल्याण और अल्पसंख्यक विभाग द्वारा मिलने वाली छात्रवृत्ति फर्जीवाड़ा कर कॉलेज मालिक और अन्य मिलकर डकार लेते थे। पुलिस हड़पी गई रकम का आकलन कर रही है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के बाद ही पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकेगा।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक छात्रवृत्ति घोटाले के इस खेल में कॉलेज के पदाधिकारियों के साथ सरकारी विभागों के अधिकारियों और बैंकों की भी साठगांठ हो सकती है। क्योंकि भगवती कॉलेज द्वारा सामान्य श्रेणी के छात्रों के अलावा ओबीसी, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक श्रेणी के छात्र-छात्राओं के नाम सूची में रहते थे। कॉलेज के छात्रों की छात्रवृत्ति स्वीकृत करने में समाज कल्याण से लेकर अल्पसंख्यक विभाग की भूमिका अहम होती है। छात्रवृत्ति बैकों के जरिए छात्रों के खाते में पहुंचती है।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) ने इस मामले पर जांच शुरू कर दी है। एकेटीयू के वीसी प्रो. विनय पाठक ने इस मामले की गंभीरता से जांच करने का आदेश दिया है। एकेटीयू नोएडा के प्रो. संजीव शर्मा ने बताया कि भगवती कॉलेज के सभी छात्र-छात्राओं की मार्क्सशीट की जांच होगी। उन्होंने बताया कि यह कॉलेज बंद होने के कगार पर है। जांच में आरोप सही पाये जाने पर एकेटीयू की ओर से इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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