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गरीब की बेटी अब उड़ाएगी वायुसेना के विमान, चाय बेचकर पिता ने पूरा किया बेटी का सपना

नीमच | यदि सच्ची लगन और समर्पण से काम किया जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। यह सच कर दिखाया नीमच मध्यप्रदेश के गंगवाल परिवार ने। नीमच की 24 वर्षीय आंचल गंगवाल ने भारतीय वायुसेना की उड़ान शाखा में चयन पाकर घरवालों का नाम रौशन कर दिया है। आंचल के पिता नीमच बस अड्डे पर चाय की दुकान चलाकर जीवन यापन करते हैं और बेटी की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं। वैसे तो आंचल के चयन का परिणाम बीते 7 जून के आ गया था लेकिन मीडिया में उस वक्त आंचल सुर्खियों में छा गईं जब उनकी पारिवारिक स्थिति और पिता सुरेश गंगवाल की चाय की दुकान के बारे में पता चला।

आंचल की ट्रेनिंग 30 जून से शुरू होगी और उनका भारतीय वायु सेना का फाइटर प्लेन उड़ाने का सपना पूरा हो जाएगा। आंचल ने जिस प्रकार और जिन परिस्थितियों में आत्म विश्वास बनाए रखते हुए सफलता हासिल की है वह देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा का काम कर सकता है। आंचल की सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि जिस परीक्षा से होकर वह गुजरी हैं उसके लिए देश भर से 6 लाख से ज्यादा आवेदन किए गए थे और महज 22 लोगों का चयन किया गया। आंचल उन्हीं 22 लोगों में से हैं और मध्य प्रदेश से अकेली चयन पाने वाली हैं।

पांच फुट सात इंच कद की आंचल ने अपनी कहानी मीडिया से जाहिर की। आंचल ने बताया कि जब वह 12वीं में थीं तब उत्तराखंड में बाढ़ आई हुई थी। उस दौरान बाढ़ प्रभावितों को बचाने के लिए सशस्त्र बलों का काम देखकर वह खासी प्रभावित हुई थीं और सेना में जाने का मन बना लिया था। आंचल कहती हैं कि तब उनकी पारिवारिक स्थिति अनुकूल नहीं थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आंचल ने बताया कि वह नीमच के मेट्रो एचएस स्कूल में कैप्टन थीं और क्लास की टॉपर थीं। उन्होंने उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए स्कॉलरशिप जीती, वहां वह बास्केटबॉल टीम में शामिल हुईं और 400 मीटर रेस का भी हिस्सा बनीं।

वह कहती हैं कि उन्हें पता था कि उनके अंदर कुछ था जिससे लगता था कि सपना पूरा होगा। इसी बीच उन्होंने कॉम्पटीटिव एग्जाम्स देने शुरू कर दिए। पुलिस सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा में पास हो गईं लेकिन ट्रेनिंग ऐसी थी कि आगे की तैयारी के लिए समय नहीं बच रहा था, तभी लेबर इंस्पेक्टर का रिजल्ट आया और उसमें वह तैयारी के लिए समय निकाल पाईं। उन्होंने बताया कि एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट दिया लेकिन आसान नहीं था। पांच बार साक्षात्कार बोर्ड का सामना किया लेकिन छठीं दफा में वह अकेली पास हुईं। आंचल की तारीफ में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कसीदे पढ़े। आंचल की सफलता पर पिता सुरेश गंगवाल की खुशी का ठिकाना नहीं है और उनसे जज्बात संभालते नहीं बनते हैं।

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