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फीस बढ़ोतरी का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, DPSG को 30 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश

गाज़ियाबाद। फीस बढ़ोतरी के मामले में गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन ने अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने दिल्ली पब्लिक स्कूल गाजियाबाद सोसाइटी के साथ सोसाइटी के चेयरमैन को भी नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने 30 जुलाई तक हाई कोर्ट में जवाब दाखिल करने का आदेश स्कूल चेयरमैन को दिया है।

बृहस्पतिवार को गाजियाबाद पैरंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी, पार्षद हिमांशु मित्तल, अमित जिंदल ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल को जमीन आवंटन दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी दिल्ली के नाम से 22 जनवरी 1981 को किया गया था। लीज डीड दिल्ली पब्लिक स्कूल गाजियाबाद सोसाइटी के नाम लिखी गई, जबकि उसका पंजीकरण ही 10 अप्रैल 1981 को हुआ था। पंजीकरण के समय ओम पाठक जिलाधिकारी थे, इसके बाद भी उन्हें सोसाइटी का सदस्य दर्शाया गया। स्कूल द्वारा आईसीआईसीआई बैंक से 45 करोड़ का ऋण लिया गया है, जबकि बैलेंस शीट में ऋण राशि 72 करोड़ दर्शाई गई है।

इतना ही नहीं 78 करोड़ रुपया ऋण के रूप में देना भी दर्शाया गया है। स्कूल के तीन वर्षों के खातों में ही 45 करोड़ का दान दर्शाया गया है। स्कूल को जब इतनी आय है तो फिर फीस में बढ़ोतरी क्यों की जा रही है? स्कूल की कमेटी में भी परिवार के चार सदस्यों को शामिल किया गया है, जबकि नियमानुसार परिवार के किसी भी सदस्य को कमेटी में शामिल नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में संस्था के सदस्य नीरज भटनागर व अमित जिंदल ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए स्कूल के चेयरमैन ओम पाठक के साथ यूपीएसआईडीसी के पूर्व रीजनल मैनेजर किशोर मोहन को नोटिस जारी करते हुए 30 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

इस मामले में स्कूल चेयरमैन ओम पाठक का कहना है कि स्कूल में किसी तरह की अनियमितता नहीं है। अगर हाई कोर्ट का नोटिस आया है तो लीगल एडवाइजर समय पर कोर्ट में जवाब दाखिल करेंगे।

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