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कहते हैं मैं सुपरमैन हूँ, पर आप करते कुछ नहीं – उप-राज्यपाल बैजल को पड़ी सुप्रीम कोर्ट की फटकार

सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आज राजधानी दिल्ली में कूड़े ने निस्तारण की समस्या से अपना पल्ला झाड़ने के लिए दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल को कड़ी फटकार लगाई। इससे पहले बैजल ने अदालत से कहा था कि कूड़ा निस्तारण की ज़िम्मेदारी नगरीय इकाई की है और वे तो केवल उसकी निगरानी के इंचार्ज हैं। सुनवाई के दौरान एमिकस क्‍यूरी कॉलिन गोंजाल्‍वेस ने अदालत को बताया कि बैठकों में उप-राज्‍यपाल के कार्यालय से कोई भी नहीं आया। यह जानकर अदालत ने एलजी बैजल को कहा कि आप कहते हैं ‘मेरे पास पावर है, मैं सुपरमैंन हूं।’ लेकिन आप कुछ करते नहीं। अदालत ने उप-राज्‍यपाल से कूड़ा बटोरने वालों को आइडेंडिटी कार्ड मुहैया कराने और दोपहर 2 बजे तक अपडेट करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने दिल्ली और केंद्र सरकारों से सख्त लहजे में पूछा कि आप बताइए कि तीनों लैडफिल साइट्स से कितने दिन में कूड़ा हटेगा। हमें इससे नहीं मतलब की आप बैठकों में चाय-कॉफी पीते हुए क्या कर रहे हैं। आप इतना बताइए कि कूड़ा कब हटेगा? साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने लैंडफील साइट की तुलना कुतुब मीनार से करते हुए कहा कि दोनों की ऊंचाइयों में मात्र आठ मीटर का अंतर रह गया है। अदालत ने कहा कि कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा गिरने से आदमी की मौत हो जाती है और आप लोग अभी भी इसको लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एलजी के ऑफिस से कोई बैठक तक में नहीं आता और ये कहते हैं कि हमारे पास अधिकार हैं। शीर्ष अदालत ने आगे कहा, ”अगर एलजी ये मानते हैं कि सब कुछ वही है तो बैठक में क्यों नहीं गए? एलजी के मुताबिक अगर स्वास्थ्य मंत्री कोई फैसला ले नहीं सकते तो एलजी ने खुद क्या किया?”