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घर से निकलें तो साथ लेकर चलें कपड़े का थैला, पॉलिथीन की थैली के साथ पकड़े गए तो लग सकता है जुर्माना

15 जुलाई से उत्तर प्रदेश में 50 माइक्रॉन से पतले प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लागू हो गया है। प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों में पॉलिथीन की थैलियाँ, प्लास्टिक और थर्माकोल से बने कप, प्लेट आदि शामिल हैं। राज्यपाल राम नायक ने इस संबंध में एक अध्यादेश जारी कर इसे कानून का रूप दिया है। संभवतः आज (15 जुलाई) को नगर विकास विभाग इस संबंध में अपनी गाइडलाइंस जारी कर सकता है।

इस अध्‍यादेश के मुताबिक कई विभागों के अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए अधिकार दिए गए हैं। अध्यादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि जब्‍त की जाने वाली प्‍लास्टिक की संख्‍या और मात्रा के अनुसार सजा और जुर्माना लगाया जा सके। प्रदेश सरकार ने छह जुलाई को राज्‍य में पॉलीथीन और तय मानकों से इतर प्‍लास्टिक उत्‍पादों पर बैन लगाने का एलान किया था। 15 जुलाई से यूपी में प्‍लास्टिक बेचने या इस्‍तेमाल करने वालों पर जुर्माना लगेगा और फिर सजा का प्रावधान किया गया है। प्रदेश की योगी सरकार ने यह फैसला पर्यावरण को बचाने और प्रदेश में अंधाधुंध हो रहे प्‍लास्टिक के इस्‍तेमाल को रोकने के लिए लिया है।

प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की ओर से उनके कार्यालय द्वारा ट्विटर अकाउंट के जरिये घोषणा की गई थी ‘हमने 15 जुलाई से पूरे प्रदेश में प्‍लास्टिक को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है मैं आह्वान करता हूं कि 15 जुलाई के बाद प्‍लास्टिक के कप, गिलास, और पॉलीथीन का इस्‍तेमाल किसी भी स्‍तर पर न हो। इसमें आप सभी की सहभागिता जरूरी होगी’। योगी आदित्‍यनाथ का कहना है कि पॉलीथीन प्रदूषण का कारक है, इसलिए इस पर रोक लगाना जरूरी है।

सूत्रों के अनुसार प्रतिबंध के पहले चरण जो 15 जुलाई से लागू हो चुका है से, 50 माइक्रोन तक की पॉलीथिन बैग प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके बाद 15 अगस्त से प्लास्टिक व थर्मोकोल आदि से बने कप, प्लेट व ग्लास प्रतिबंधित किए जाएंगे। तीसरा और अंतिम चरण में दो अक्टूबर से सभी प्रकार के पॉलीबैग व प्लास्टिक जो कंपोस्ट नहीं हो सकते हैं उन पर प्रतिबंध किया जाएगा।

आपको बता दें कि अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान भी उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक को बैन करने की असफल कोशिश हो चुकी है। सरकार की ओर से प्लास्टिक को बैन तो किया गया था लेकिन प्लास्टिक बैन के क्रियांवयन के लिए किसी भी एक एजेंसी को पूरी जिम्मेदारी ना मिलने के कारण ये बैन लागू नहीं हो सका और उसके बाद से प्लास्टिक बैन को लेकर बेहद संजीदा प्रयास नहीं किए गए।

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