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संकट में फंसी लड़की और तमाशबीन

कोई दिल से बुरा हो तो नाराज़ भी हुआ जाए पर अगर किसी की आदत उसकी मजबूरी बन चुकी हो तब क्या किया जाए? हम लोगों की कुछ आदतों की वजह से ना जाने कितने लोग परेशान होते हैं पर आदतें हैं कि छूटती ही नहीं। आये दिन सड़क पर लोग घायल होते हैं पर बेतहाशा गाड़ियाँ दौड़ाने की आदत जाती ही नहीं लोगों की। शॉर्ट कट और पेट्रोल बचाने के लिए रॉंग साइड गाड़ी चलाने वालों को आज तक कोई नहीं सुधार सका। फाटक पर लाइन से खड़े लोगों को बेवकूफ मानकर ऐन फाटक तक जाकर गाड़ियां खड़ी करने वालों की आदत से हर बार जाम लगता है पर सालों साल से ये मूर्खता चल ही रही है।
जापान जैसे देश में लोग एस्केलेटर पर भी लाइन में खड़े होते हैं पर अपने शहर के कई जांबाज़ कभी भी लाइन में नहीं खड़े होते। पॉलिथीन की एक थैली में ब्रेड और मख्खन, एक थैली में अंडे और एक पोलीथिन में दूध लेकर आते लोग सालों साल से यही कर रहे हैं। सड़क पर मुसीबत में फंसे किसी आदमी को अनदेखा कर आगे बढ़ जाने की बुरी आदत भी काफी लोगों की मजबूरी बनी हुई है। ऐसे लोगों के कारण ही दिसंबर के महीने में एक युवती पौने घंटे तक डरी सहमी अपनी कार में कैद रहने को मजबूर हुई। ये घटना हमारी फैक्ट्री के पास विवेकानंद आरओबी की है।
हुआ यूं कि दिन भर की ड्यूटी के बाद एक युवती कार से अपने घर जा रही थीं। एनएच24 से श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क के सामने से होते हुए उसे राजनगर एक्सटेंशन जाना था। मुखर्जी पार्क चौराहे पर अपनी ही मस्ती में आड़ी-तिरछी गाड़ी चला रहे बाईक सवार दो लड़कों से उसकी गाड़ी की साइड लग गयी। उस युवती ने गाड़ी का शीशा नीचे किया और उन्हें ध्यान से बाइक चलाने को कहा। लड़कों को एक महिला द्वारा दी गई यह सीख बर्दाश्त नहीं हुई। युवकों ने जोर से चिल्ला कर गाड़ी रुकवाने की कोशिश की तो लड़की डर गयी। उसने शीशा बंद किया और गाड़ी चलाती रही। लड़कों ने गाड़ी को ओवरटेक कर विवेकानंद फ्लाई ओवर पर सड़क के बीचों-बीच अपनी बाइक युवती की गाड़ी के आगे लगा दी। युवती घबरा गई पर उसने समझदारी से काम लिया। वह अपनी गाड़ी में ही बैठी रही और इशारे से लड़कों को वहां से जाने के लिए कहने लगी। लड़कों को पता चल गया था कि लड़की डरी हुई है, लिहाजा वो अड़ियल सांड की तरह गाड़ी के आगे जमे रहे। वहां आस पास से कई गाड़ियां और बाइक सवार गुजर रहे थे पर लड़कों के तेवर देख कर कोई भी वहां रुका नहीं। इस बीच लड़कों ने फोन कर के अपने दो और साथियों को भी वहां बुला लिया था।
रास्ता रोके लड़कों से परेशान उस युवती ने अपने भाई और मम्मी को फोन कर दिया था। लेकिन 100 नंबर न लगने के कारण पुलिस को सूचना नहीं दे पा रही थी। लड़की के भाई ने हमारे औद्योगिक क्षेत्र के एक अपने मित्र उद्यमी को फोन कर के लड़की की मदद करने को कहा पर वह घटना की सही लोकेशन नहीं बता पा रहे थे। संयोग से ‘’हमारा गाज़ियाबाद’’ के एडिटर विशाल शर्मा मेरे से मिलने मेरी फैक्टरी आये हुए थे और तभी इस उद्यमी ने मुझे फोन कर इस घटना के बारे में बताया। मैंने विशाल जी को तुरंत 100 नंबर पर फोन करने को कहा तो वे बोले कि पुलिस को सही लोकेशन बताना ज़रूरी है लिहाजा बिना समय गवाएं मैं और विशाल जी अपनी कार से विवेकानंद आरओबी की ओर भाग लिए।
आरओबी तक पहुँचने पर हमने पाया कि युवती की कार के आगे 2 बाइक इस तरह से खड़ी की गयी थीं कि कार आगे जा ही नहीं सकती थी। विशाल जी ने लड़कों से माजरा पूछा तो वो पलट कर हम पर ही गुर्राए। बोले ये लड़की पीछे एक्सीडेंट कर के भागी है और हमने इसे यहाँ पकड़ा है। उनकी इस हरकत पर मुझ से रहा नहीं गया और मैंने उनकी बाइक खींच कर एक साइड कर दी। हमें इन लड़कों से उलझता देख कुछ और लोग भी रुक गए और फिर दो मिनट में ही लड़के बचाव की मुद्रा में आ गए। घबराई हुए वो लड़की गाडी का शीशा नीचे कर हमें थैंक्स कहने लगी। पुल पर भीड़ बढ़ती देख हमने उस लड़की को वहां से जाने के लिए बोला और वो चैन की सांस ले वहां से चली गयी। भीड़ अब बिना पूरा मसला जाने लड़कों को पीटने को आगे बढ़ी लेकिन तब तक वहाँ मौजूद किसी भले आदमी ने 100 नंबर पर फोन कर दिया और पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा और फिर लड़कों को डांट कर वहां से भगा दिया।
घटना स्थल पर पहुँच कर लड़कों की पहली बाइक हटाने के पाँच मिनट में ही सारा मामला सुलट गया था लेकिन पिछले तीस मिनट में उस लड़की पर क्या बीती होगी इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। दो-चार लड़कों को हेकड़ी करते देख लोगों की डर जाने की आदत ने एक युवती और उसके घरवालों को एक ऐसी खौफनाक याद दे दी थी जिसे वे ज़ल्दी नहीं भूल पायेंगे। बदकिस्मती से अगर वह लड़की गाड़ी से बाहर आ जाती तो शायद अंजाम और खराब हो सकता था।
अगर हम ये समझ लें कि सड़क पर गुंडई दिखाता हर आदमी कोई स्थापित बदमाश नहीं होता और आम आदमी की समझ और साहस के सामने बड़ी से बड़ी बुराई भी टिक नहीं सकती तो समाज में कोई निर्दोष किसी के पागल पन का शिकार नहीं होगा। संकट में साहस का प्रदर्शन एक आदत है जिसे किसी भी उम्र में सीखा जा सकता है और किसी को परेशान छोड़ कर आगे बढ़ जाना स्मार्टनेस नहीं बल्कि एक सेल्फिश और कायर आदमी की आदत है जिसे छोड़कर अच्छा आदमी भी बना जा सकता है। उम्मीद है हमारे गाज़ियाबाद में हर बहन और बेटी बेख़ौफ़ होकर रह सकेगी, इसी आशा के साथ
आपका अपना
अनिल कुमार