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सरकारी नौकरियों से आरक्षण हटाना है असंभव – संसद में बोले गृहमंत्री राजनाथ सिंह

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई व्यक्ति या संस्था अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों का आरक्षण नहीं छीन सकती है। गृहमंत्री आज संसद में विश्वविद्यालयों और महा विद्यालयों की नियुक्ति में आरक्षण लागू करने को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रहे थे। शून्यकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पांच मार्च की एक अधिसूचना का हवाला दिया और आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आरक्षण खत्म करना चाहती है।

सपा सांसद ने कुछ विश्वविद्यालयों में निकली रिक्तियों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को अध्यादेश जारी कर उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण को बहाल करना चाहिए। इस पर गृह मंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था आरक्षण नहीं छीन सकती। सिंह ने कहा कि इस पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय विस्तृत जवाब देगा। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर प्रश्नकाल के दौरान सपा सदस्य शिक्षण संस्थाओं में अनुसूचित जाति, जनजाति एव पिछड़े वर्गो के आरक्षण के प्रावधान को ठीक ढंग से लागू नहीं किए जाने का आरोप लगा रहे थे। सपा सदस्य इस विषय को उठाते हुए आसन के समीप आकर नारेबाजी भी कर रहे थे।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों के प्रति बढ़ते अपराधों पर राज्यसभा में व्यक्त की गई चिंता के जवाब में कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था इन समुदायों के संरक्षण संबंधी कानूनी प्रावधानों में कटौती नहीं कर सकता है। राजनाथ सिंह ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान इस बारे में पूछे गए एक पूरक सवाल के जवाब में कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों को संविधान में प्रदत्त संरक्षण को कोई व्यक्ति अथवा संस्था नहीं छीन सकती है। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को प्रताड़ित करने सहित अन्य प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए भी सरकार ने नियमों में संशोधन किया है। भाकपा के डी राजा ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों के प्रति अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक जांच, दोषसिद्धि की घटती दर और संबद्ध कानूनी प्रावधानों में ढील देने का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में सिंह ने इस दिशा में सरकार द्वारा किए गए उपायों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें थीं लेकिन सरकार ने अब देश भर में 194 अनन्य विशेष अदालतें गठित की हैं। गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने पिछले चार सालों में अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्तियों के प्रति अपराधों में इजाफे की आशंका को आंकड़ों के आधार पर गलत बताया।

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