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क्राइम ब्रांच अफसर बनकर करते थे लूटपाट, 6 गिरफ्तार, 20 लाख का माल बरामद

गाज़ियाबाद पुलिस की स्पेशल अल्फा टीम ने क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर जांच के बहाने घर में घुसकर लूटपाट करने वाले 6 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बदमाशों के पास से करीब 20 लाख रुपये कीमत के गहने बरामद किए हैं। यह गिरोह राह चलती महिलाओं से कुछ अनिष्ट होने की आशंका बताकर ठगी भी करता था। इसके अलावा राशि वाले नगों को बेचने के नाम पर बेहोशी की दवा वाला रूमाल सुंघाकर भी लूट की वारदात को अंजाम देता था। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस पूछताछ में पिछले 6 महीनों में लूट और ठगी की 36 वारदात करने की बात कबूली है। वहीं, पुलिस ने इस गिरोह द्वारा 13 वारदात किए जाने की पुष्टि की है। अन्य घटनाओं के बारे में पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है।

एसएसपी वैभव कृष्ण के निर्देश पर जिले में बदमाशों की धरपकड़ के लिए अल्फा और बीटा टीमों का गठन किया गया है। मंगलवार को अल्फा टीम ने मुखबिर की सूचना पर मोहन नगर चौराहे के पास से 6 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी ने बताया कि शातिरों के नाम दिलशाद, वारिसुद्दीन, आमिर उर्फ कालू, रुस्तम निवासी मेरठ, नौशाद और इकबाल निवासी उधम सिंह नगर, उत्तराखंड हैं। आरोपितों के पास से सोने की 12 चेन, 8 चूड़ियां, 36 कुंडल, 4 झुमके, 10 अंगूठी, 2 टॉप्स, 1 लॉकेट, 2 मोबाइल और 4 हजार रुपये कैश बरामद किए गए हैं। एसएसपी ने बताया कि बदमाशों ने गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, बरेली, बागपत, मुरादाबाद और दिल्ली में लूट और ठगी की वारदात करने की बात कबूली है। वहीं, पुलिस ने जिन 13 वारदातों का खुलासा किया है। इनमें 2 वारदात मेरठ में, 6 वारदात गाजियाबाद में और 4 वारदात बुलंदशहर में अंजाम दी गईं थी। इनमें 6 वारदात लूट और 7 ठगी की हैं।

इस गिरोह के बदमाश राह चलती महिलाओं को ग्रह दशा खराब होने की बात कहकर डरा देते थे और फिर उपाय के नाम पर उनके पहने हुए गहने एक कपड़े में बांधने को कहते थे। इसके बाद कुछ देर तक आंख बंद करने को कहकर कपड़े में से गहने निकालकर पत्थर आदि रख देते थे। यदि कोई इनके झांसे में नहीं आता था तो गिरोह के सदस्य उसे नशीली दवा वाला रूमाल सुंघाकर वारदात को अंजाम देते थे। इसके अलावा ये लोग नग और स्टोन दिखाकर उसे चमत्कारी बताते हुए किस्मत बदलने की बात कहकर भी लोगों के साथ ठगी करते थे।

गिरोह के सदस्य खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर किसी के घर में जांच के बहाने घुस जाते थे और चेकिंग के नाम पर चोरी और लूट की वारदात को अंजाम देते थे। गिरोह का सॉफ्ट टारगेट महिलाएं होती थीं। क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर घर में घुसने पर भी गिरोह के सदस्य महिला को परिवार के किसी सदस्य के साथ कुछ बुरा होने या बदमाशों के आने की बात कहकर डराते थे। इसके बाद घर में रखा कैश, गहने एक स्थान पर जमा करने के लिए कहते थे। यदि कोई महिला विरोध करती थी तो गिरोह के सदस्य हथियार के बल पर लूट की वारदात को अंजाम देते थे।

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