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बकरी से बलात्कार – हारून और जफ़्फ़ार ने साबित कर दिया मर चुकी है इंसानियत

थॉमसन रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। लेकिन हरियाणा के मेवात में हुई एक घटना ने साबित कर दिया कि अब भारत में महिलाएं तो क्या जानवर भी सुरक्षित नहीं है। दरअसल मेवात हरियाणा में असलू नाम के एक आदमी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी गर्भवती बकरी के साथ 8 लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया जिसके बाद उसकी बकरी की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक बकरी के शरीर को डाक्टरी जांच के लिए भेज दिया गया है।
बताया जा रहा है कि जिन लोगों ने यह नापाक हरकत की थी सावकार, हारून, जफ्फार और पांच अलग लोग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी अपराधी को पकड़ा भी नहीं गया है। अभी कुछ समय मेरठ से भी ऐसा ही एक केस सामने आया था जहां एक कुत्ते के साथ रेप किया गया था और उसे भी अधमरी हालत में छोड़ दिया गया था। बकरी वाले इस मामले में पुलिस ने धारा 377 (अप्राकृतिक जुर्म) और धारा 429 (जानवरों को मारना या उनके साथ कुछ गलत करना) के तहत केस दर्ज कर लिया है। बकरी की मौत कई चोटें लगने से हुई, लेकिन उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
अब इस मामले को क्या कहा जाए? ये तो ऐसा मामला है जो पकड़ में आ गया, लेकिन बाकी जानवरों का क्या? क्या आप जानते हैं कि कितने जानवरों के साथ ऐसा होता आया है? ये दरिंदे हमारे बीच ही होते हैं और हमारी जिंदगी का हिस्सा ही होते हैं। पहले ये जानवरों पर अपनी जोर आजमाइश करते हैं और फिर इंसानों पर।
जब हमने गूगल बाबा की शरण ली तो पता चला कि कुरान और हदीस दोनों ही में जानवर के साथ संभोग पर नियम स्पष्ट नहीं हैं। कहीं इसे जायज़ बताया गया है तो कहीं हराम। अलबत्ता मुस्लिम धर्म प्रचारक ज़ाकिर नाईक के एक भाषण का जिक्र मिला है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर कोई महिला उपलब्ध नहीं है तो मुस्लिम आदमी अपनी काम पिपासा शांत करने के लिए बकरी या भेड़ के साथ संभोग कर सकता है। इसके साथ ही ज़ाकिर नाईक ने कुछ शर्ते भी बताईं जिनके अनुसार संभोग करने के बाद बकरी या भेड़ को मार देना चाहिए। ऐसे जानवर का मांस उस गाँव के लोगों के लिए हराम है जिस गाँव के व्यक्ति ने यह काम किया है, मगर उसका मांस पड़ोस के गावों में बांटा जा सकता है।
आश्चर्य की बात है कि तीन तलाक और हलाला जैसी परम्पराओं को सही ठहराने वाले मुल्ला-मौलवी इस वाकये पर खामोश बैठे हैं। टीवी पर एक महिला के साथ मारपीट करने वाले मौलवी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी इस घटना की निंदा करने के बजाए खामोशी अख़्तियार कर ली है। महिलाओं के बाल कटाने या लिपस्टिक लगाने पर फतवे जारी करने वाले देवबंदी भी खामोश हैं।

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