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राज्य सभा पर हुई “हरी” कृपा, 41 साल बाद कांग्रेस के हाथ से गया उप सभापति का पद

आज राज्यसभा में उपसभापति पद के लिये हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को जीत मिली है। तीन बार हुई वोटिंग में उन्हें 125 वोट मिले जबकि विपक्ष के उम्मीवार बीके हरिप्रसाद को 105 वोट मिले। हरिवंश की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी।
बीजू जनता दल के समर्थन के बाद वोटिंग से पहले ही हरिवंश नारायण सिंह की जीत तय मानी जा रही थी। वोटिंग प्रक्रिया में भाजपा से नाराज शिवसेना ने हरिवंश के समर्थन में प्रस्ताव देकर भी एनडीए को सियासी राहत दी है। जबकि, दूसरी तरफ कांग्रेस को सदन के अंदर एंटी बीजेपी मोर्चा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी को अपने नामित उम्मीदवार के पक्ष में क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
राज्यसभा में उपसभापति के लिए हुआ चुनाव कई मायनों में अहम रहा। आम तौर पर संसद के उच्च सदन के लिए उपसभापति के लिए चुनाव आम सहमति से हो जाता था। लेकिन इस बार चुनाव की नौबत आ गई। ना तो भाजपा के पास नंबर थे और न ही कांग्रेस के पास। आपको बता दें कि 26 साल बाद राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव हुए। इससे पहले 1992 में आखिरी बार चुनाव हुए थे। 1969 में पहली बार राज्यसभा उपसभापति के लिए चुनाव हुए थे। अब तक इस पद के लिए कुल 19 बार चुनाव हुए हैं। इसमें 14 बार तो आम सहमति के ही उपसभापति को चुन लिया गया है.
244 सदस्यों की राज्यसभा में इस बार जीत के लिए 123 सासंदों का समर्थन चाहिए था। यूपीए इस लड़ाई में इसलिए पिछड़ गई, क्योंकि भाजपा को सहयोग नहीं करने वाली पीडीपी, वाइएसआर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। एनडीए के सदस्य को 125 वोट मिले, वहीं यूपीए को 105 वोट मिले।

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