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अवैध कॉलोनियों पर योगी सरकार हुई सख्त, बसाने वालों की होंगी संपत्ति जब्त

उत्तर प्रदेश में शहरों व उनके आसपास के गांवों में बनी अवैध कॉलोनियों में रहने वालों के लिए एक राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने फैसला किया है कि अवैध कालोनी बसाने वालों की संपत्तियां जब्त कर वहां विकास के काम कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने गुरुवार को एक शासनादेश जारी करते हुए विकास प्राधिकरणों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। ऐसी कालोनियों के 15 दिन में गूगल मैप तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य आवास विभाग शहरों में बनी अवैध कालोनियों में रहने वालों से पैसे लेकर इसे वैध करने के लिए नीति लाने वाला था। मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतीकरण के दौरान कहा कि कालोनियों में रहने वालों से पैसा न लेकर दोषियों को दंडित किया जाए। प्रमुख सचिव आवास ने इसके आधार पर शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद से मकान न पाने वाले प्रॉपर्टी डीलरों से जमीन लेकर मकान बनवाकर रह रहे हैं। किसानों की खेती की जमीन को अधिग्रहण व कब्जा होने का भय दिखाकर विकासकर्ता फर्जी विज्ञापन से लोगों को धोखा देकर मास्टर प्लान में लेआउट के विपरीत किसानों से सीधे रजिस्ट्री करा देते हैं। इसमें प्रापर्टी डीलर की मात्र बिचौलिये की भूमिका होती है। जमीन बेचने के बाद वह चलता बनता है और जमीन लेने वाला मकान बनाने के बाद फंस जाता है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि ऐसे लोगों से जमीन लेने वाले अपनी जमा पूंजी के अनुसार बाउंड्रीवाल व मकान बनवाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। वहीं विकास प्राधिकरण के अभियंता या कर्मचारियों को इसकी जानकारी होने तक काफी देर हो चुकी होती है। इसके चलते शहरों में अवैध कॉलोनियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें जरूरी सुविधाएं रहने वालों को नहीं मिलती हैं। इसके बाद अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए विकास शुल्क व अन्य शुल्क के रूप में फिर से इनमें रहने वालों से ही वसूलता जाता है। इस तरह से इन कालोनियों में रहने वालों को दो बार पैसे देने पड़ते हैं। इसके साथ ही विकास शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र शुल्क, शमन शुल्क व अन्य निर्धारित शुल्क जमा न करने पर मकान गिराए जाने का डर लोगों में बना रहता है।
इससे केवल मध्यवर्गीय विकासकर्ता व प्रापर्टी डीलरों को फायदा हो रहा है और इनसे जमीन लेने वालों व राज्य सरकार का नुकसान हो रहा है। इसीलिए अवैध कालोनी बनाने व बिना लेआउट पास कराए जमीन बेचने के लिए प्रापर्टी डीलर व मध्यवर्गीय विकासकर्ता ही असली दोषी होता है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आवास विभाग ने यह महत्वपूर्ण फैसला किया है।

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