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रहने के मामले में एनसीआर का सबसे बेहतर शहर बना – हमारा गाज़ियाबाद

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गुरुग्राम, नोएडा और फ़रीदाबाद जैसे शहरों को छोड़ कर हमारे गाज़ियाबाद ने पहला स्थान प्राप्त किया है। शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी “जीवन सुगमता सूचकांक” (Ease of Living Index) में जिन 111 शहरों की सूची जारी हुई है उसमें गाज़ियाबाद को 46 वां स्थान मिला है। हमारे शहर को मिली इस उपलब्धि का आधार रहने के लिए मकानों की उपलब्धता, खुले स्थान व प्रदूषण कम करने की दिशा में प्रशासन व जागरूक नागरिकों द्वारा सम्मिलित प्रयास रहे। इस सूची प्रदेश स्तर पर गाज़ियाबाद तीसरे स्थान पर रहा।
दरअसल इस साल फरवरी से अप्रैल तक केंद्र सरकार की ओर से 111 शहरों में जीवन सुगमता सूचकांक सर्वे कराया गया। यह सर्वे चार मापदंडों पर आधारित था। इसमें हर श्रेणी के अंकों को जोड़ कर “जीवन सुगमता सूचकांक” रैंक घोषित की गई। इस परिणाम में गाजियाबाद टॉप 50 शहरों में शामिल है।
बजट के हिसाब से आवास
आवास की उपलब्धता के मामले में गाजियाबाद की रैंक नंबर वन रही। इसका मतलब यह है कि गाजियाबाद में एनसीआर क्षेत्र में लोगों को रहने के लिए बेहतर आवास उपलब्ध हैं। यदि जीडीए, प्रशासन ने यहाँ बेहतर आवास की सुविधाएं दी हैं तो गाज़ियाबाद नगर निगम भी सुविधाएं देने के मामले में पीछे नहीं रहा है। यहाँ सभी के बजट के अनुसार आसानी से आवास उपलब्ध हैं। यही कारण है कि दिल्ली, फ़रीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा में काम करने वाले लोग गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी और राज नगर एक्सटैन्शन जैसे क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं।
हरियाली और स्वच्छ आबोहवा
गाज़ियाबाद ने सार्वजनिक खुली जगह के मामले में भी सातवीं रैंक प्राप्त की है, जो एनसीआर में नंबर वन है। इससे साफ है कि यहां रहने वाले लोगों को घूमने व खेलने के लिए काफी स्थान है। बड़े बाजार के साथ पार्कों की स्थिति भी काफी है। आपको बता दें कि गाज़ियाबाद नगर निगम क्षेत्र के 100 वार्डों में 1400 पार्क हैं। इनमें से 800 से ज्यादा पार्क पूरी तरह विकसित हैं। कई बड़े पार्क अमृत योजना के तहत बड़े स्तर पर विकसित किए गए हैं।
कई मामलों में है गाज़ियाबाद नंबर वन
स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में गाजियाबाद 36वें स्थान पर रहा, जबकि वर्ष 2017 में इसकी रैंक 351 थी। एक साल में अपनी रैंक सुधारने पर गाजियाबाद को देश का सबसे फास्टेस्ट मूवर सिटी का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इतना ही नहीं प्रदेश में सबसे पहले खुले में शौच मुक्त शहर भी गाजियाबाद को ही घोषित किया गया। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में दूसरा स्थान प्रदेश स्तर पर इस प्रतियोगिता में गाजियाबाद को तीसरा स्थान मिला है, लेकिन यदि दस लाख से अधिक आबादी वाली शहरों को लें तो वाराणसी के बाद गाजियाबाद दूसरे स्थान पर है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रैंक 73 रही। वहीं मेरठ की रैंक 101 व रामपुर सबसे अंतिम 111वें स्थान पर रहा।
शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में पिछड़ा शहर
इस सर्वे से एक खराब बात भी सामने उभर कर आई। गाज़ियाबाद को भले ही एजुकेशन हब के रूप में पहचाना जाता हो लेकिन जीवन सुगमता सूचकांक में शिक्षा को लेकर 106 वीं रैंक मिली। शिक्षा की यह रैंक बेसिक शिक्षा को लेकर रही। इससे सरकारी स्कूल में शिक्षा के स्तर को मापा गया। इसके साथ ही बच्चों को दी जानी वाली सुविधाओं को परखा गया। इसके साथ ही शहर अपनी संस्कृति में भी कुछ खास नहीं रहा। इस श्रेणी में 89वीं रैक प्राप्त हुई। शायद इसका कारण यह है कि देश के हर प्रांत से हजारों लोग यहाँ आकर बस गए हैं। ये लोग अपने साथ अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति भी लाए और इन सब के बीच गाज़ियाबाद ने अपनी मूल पहचान को खो दिया।
स्मार्ट सिटी की दौड़ से हो चुका है बाहर
हमारा शहर तीन बार स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो चुका है। इसके लिए शहर की साफ सफाई को जिम्मेदार माना गया। उसके बाद सफाई के लिए शहर में योजना बनाई गई। करीब 350 से ज्यादा कूड़घरों को विलोपित किया गया। यह योजना पूरे प्रदेश स्तर पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही शहर की सड़कों के ग्रीन बेल्ट को विकसित किया है। खुले में शौच मुक्त करने के लिए यूरिनल व सार्वजनिक शौचालय बनाए गए। इसी आधार पर शहर अपनी रैंक को सुधारने में कामयाब हो सका। शहर को और ज्यादा बेहतर बनाने की योजना है। इसके लिए कई प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इनके लागू होने पर शहर के लोगों और बेहतर सुविधा मिल सकेंगी।

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