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पर्यावरण प्रेमी को दी लोगों ने अनूठी श्रद्धांजलि, शवयात्रा में बांटे गए पौधे

पेशे से किसान और दिल से पर्यावरण कार्यकर्ता रहे मरम थंगसामी ने 81 साल की उम्र में रविवार को आखिरी सांस ली। पुडुक्कोट्टाई में सेंथानकुडी गांव में उनकी अंतिम यात्रा के दौरान लोगों को पौधे दिए गए। इस तरह एक ऐसे शख्स को बेहद सटीक विदाई दी गई, जिसने अपना सारा जीवन पर्यावरण की रक्षा का संदेश देने में निकाल दिया।
थंगसामी ने पिछले 50 साल में लाखों पेड़ लगाए। उन्होंने न सिर्फ पेड़ लगाए, बल्कि पूरे देश में घूमकर लोगों को पेड़ों का महत्व समझाया। उन्हें राज्य सरकार की ओर से अरिग्नर अवॉर्ड से नवाजा गया था। उनके अंतिम संस्कार पर उनके परिवार ने लोगों को पौधे भेंट किए। मरम थंगसामी ने अपने जीवन में लाखों पेड़ लगाए और उनके देहांत के बाद 1000 पौधे बांटे गए।
नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार वह लकवे के अटैक के बाद पिछले चार साल से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी धनलक्ष्मी का देहांत दो हफ्ते पहले ही हुआ था। थंगसामी ने भी रविवार को दम तोड़ दिया। थंगसामी ने अपने शुरुआती जीवन में खेती की लेकिन करीब चार दशक पहले भारी नुकसान होने पर उन्होंने खेती छोड़ दी। इसके बाद कुछ वक्त के लिए उन्होंने होटेल्स में काम किया।
फिर उन्हें एहसास हुआ कि केमिकल फर्टिलाइजर्स से खेती पर असर पड़ता है। उन्होंने पेड़ों को फसलों से कम ध्यान देने पर भी बढ़ते हुए देखा तो पेड़ लगाने शुरू कर दिए। पेड़ बेचकर उन्होंने अपना कर्ज भी चुका दिया। थंगसामी ने 12 एकड़ जमीन पर एक छोटा जंगल बना दिया। इस जंगल में पेड़ों की 100 से 150 प्रजातियां मौजूद हैं।

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