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राम मंदिर के लिए हो सकता है “महाभारत”- संघ प्रमुख

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरूवार 20 सितंबर को एक पुस्तक विमोचन के माध्यम से राम मंदिर को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। हेमंत शर्मा की पुष्तक “युद्ध में अयोध्या” और “अयोध्या का चश्मदीद” के बहाने दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में यह संदेश दिया है कि, वह अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए संघ की तरफ से हर संभव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने इस मंच से साफ़ किया कि,राम मंदिर बनाने को लेकर यदि शांतिपूर्ण और न्याय से हल नहीं निकलता तो संभव है अयोध्या में महाभारत हो। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि, आगे वह ऐसा नहीं चाहते। किताबों के लोकार्पण के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे।

अयोध्या अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह अयोध्या है जहां युद्ध नहीं होता यह ऐसी भूमि है। जिसे युद्ध से नहीं जीता जा सकता इसलिए इस नगर का नाम अयोध्या है, संघ प्रमुख ने कहा- यही मर्यादा भी है। यह भारत के लोगों के मस्तक की तिलक रेखा है। रामायण में महाभारत कहकर उन्होंन ‘महाभारत’ को टालने की कोशिश का जिक्र करते हुए भागवत ने साफ संदेश दिया कि वो कहा कि ‘हम किसी प्रकार का संघर्ष नहीं चाहते, यह चीजें टालनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ‘रामायण में जहां जहां युद्ध का जिक्र हुआ है वहां वहां युद्ध को टालने के पूरे प्रयास किए गए हैं। अंत में भगवान राम ने भी पहले अंगद को भेजा है ये सारी बातें आप भी जाने हैं।’ उन्होंने कहा हमारी भी यही कोशिश है।’ उन्होंने आगे कहा जब जब सत्य और न्याय की उपेक्षा होती है तब तब स्थिति खराब होती है।

उन्होंने कहा कि मैं, रामायण में महाभारत ला रहा हूं कि महर्षि व्यास ने महाभारत की कहानी सुनते हुए कहा कौरवों और पांडवों के बीच भी युद्ध हुए। मैं समझता हूं ऐसे क्या पसंद हुआ कि युद्ध हुए इसे रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते थे? क्या इस युद्ध को रोकने का किसी ने प्रयास नहीं किया? यदि यह किया तो उसकी विफलता के क्या कारण थे, इस पर सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं राम मंदिर ढहाया गया उस दिन से हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्यों ऐसे प्रसंग होते हैं और क्या करने से ऐसी बातें टल सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन प्रश्नों का उत्तर भी इन ग्रंथों में हैं। उन्होंने कहा कि आप मेरे विचार से सहमत हो न हों लेकिन आप इस किताब के जरिए उस प्रश्न का उत्तर ढूंढ सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि. जब जब सत्य और न्याय की उपेक्षा होती है अहंकार के कारण अपना स्वार्थ होता है, तो अयोध्या में भी महाभारत हो सकता है। अयोध्या में राम नहीं होना चाहिए लेकिन होता है अयोध्या में राम जन्म भूमि है, उनका मंदिर था वह ढहा है, उस पर भारत के करोड़ों अरबों लोगों की आस्था का मामला है, जन्म भूमि एक ही होती है। उस पर मंदिर बनाने की मांग है। भागवत ने कहा कि उन लोगों के उस कथन पर सवाल उठाए जो ये अक्सर सवाल उठाते हैं कि राम का अस्तित्व है ही नहीं वो हुए ही नहीं। अयोध्या थी ही नहीं उन्होंने कहा कि अंत में भूगर्भ से चित्र लिए गए खोदकर देखा गया। उसमें भी यह प्रमाण मिले। उन्होंने कहा कि यह उन लोगों के इस देश के लोगों के सब्र की परीक्षा है, उन्होंने आगे कहा कि यहां बैठे हम लोग तो सब्र कर लेंगे गरीब गांव में रहने वाले लोगों को सब्र रहता है क्या ? उन्होंने कहा कि हम न्याय की उपेक्षा करते रहे, राजनीति करने में उपयोग करते रहे और इसे टालते रहें। हम सत्य और न्याय पर चलेंगे, लेकिन स्वार्थ की रोटियां सेंकने वाले लोग जब ऐसा करते हैं तब भावनाएं भड़कतीं हैं। ये देश राम कृष्ण, शिव का है हम इसे नहीं नकार सकते हैं। हजारों वर्षों से करोड़ों हिंदू समाज इसे बात मानता है।

भागवत ने कहा कि, तीन सौ साल पुरानी घटना का प्रमाण देते वक्त उस पर भी विवाद होता है लेकिन आज के जमाने में 8000 साल पुरानी घटना जिसका कार्बन डेटिंग भी सही नहीं हो सकता ऐसे का प्रमाण मांगा जा रहा है। ये आस्था पर सवाल है श्रद्धा पर सवाल है। ये सारी बातें नीति गत है, सीधा सपाट सत्य है। सारी बातें सब को अच्छी लगें ये संभव नहीं है।

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