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क्या करें जब पुलिस दर्ज न करे आपकी एफ़आईआर

हम सभी ने मीडिया के माध्यम से ऐसे मामलों को जरूर पढ़ा-सुना होगा जिनमें पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज करने में आनाकानी की या फिर अपने हिसाब से FIR में बदलाव कर दिया। आम आदमी ऐसा होने पर बहुत परेशान हो जाता है। उसे समझ नहीं आता कि ऐसी परिस्थिति में क्या करें? लेकिन ऐसे मामलों में अब परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्योंकि इसे लेकर बाकायदा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस हैं, जिनकी जानकारी हम आपको देने जा रहे हैं। इसके अलावा अगर फिर भी कोई सुनवाई नहीं होती तो एक चैनल है जिसके जरिए अपनी शिकायत को बड़ी अथॉरिटी के पास सीधे भेज सकते हैं।
हाईकोर्ट के वकील रजनीश दुबे एफ़आईआर दर्ज करने से संबंधित कानून के बारे में बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने ललिता कुमारी वर्सेज गवर्नमेंट ऑफ यूपी केस में सीआरपीसी के सेक्शन 154 के तहत FIR को लेकर कुछ गाइडलाइन्स जारी की थीं। जिसमें इस बात का साफ जिक्र था कि अगर एफ़आईआर किसी दंड योग्य अपराध के बारे में जानकारी देती है तो कोई भी पूर्व जांच जरूरी नहीं है। यानी ऐसी स्थिति में एफ़आईआर दर्ज किया जाना अनिवार्य है। हालांकि कई मामलों में देखा गया है कि अपनी सहूलियत के लिए पुलिस इसमें बदलाव भी कर देती है। लेकिन अगर आपके साथ ऐसा कुछ होता है तो आप इसकी शिकायत पुलिस के बड़े अधिकारी से कर सकते हैं।
एसएसपी से कर सकते हैं शिकायत
अगर पुलिस आपकी एफ़आईआर में अपने हिसाब से कुछ बदलाव कर रही है तो ऐसे में आपके पास एक चैनल होता है जिसके जरिए आप आगे कदम उठा सकते हैं। एफ़आईआर दर्ज करने में गड़बड़ी से संबंधित आपकी कोई शिकायत है तो आपको इस गड़बड़ी की शिकायत के लिए अपने जिले के एसएसपी को एक एप्लीकेशन देनी होगी। अगर एसएसपी के पास भी सुनवाई नहीं होती तो आपको अपनी शिकायत से संबंधित एप्लीकेशन डीआईजी को देनी होगी।
न्यायालय से भी ले सकते हैं मदद
अगर फिर भी आपकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं होती है तो आप अपने क्षेत्र से संबंधित मजिस्ट्रेट को सीधे एप्लीकेशन दे सकते हैं। एक मजिस्ट्रेट के क्षेत्राधिकार में 4 से 5 थाने आते हैं। अगर आप पीड़ित या वादी हैं और फिर भी किसी कारणवश आपकी शिकायत की सुनवाई नहीं हो रही है तो आपको डिस्ट्रिक्ट जज यानी जिला एवं सत्र न्यायाधीश को एप्लीकेशन देकर सारे मामले से अवगत कराना होगा। फिर भी सुनवाई न होने की स्थिति में आप हाईकोर्ट में जा सकते हैं।
अगर फिर भी सुनवाई नहीं होती और आप सीधे पीड़ित या वादी नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में आप सीधे पब्लिक इन्टरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) दायर कर सकते हैं। पीआईएल सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में फाइल की जाती है। एक पीआईएल को फाइल करने की फीस केवल 50 रुपये होती है।
आशा करते हैं कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
(आभार – न्यूज़18)

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