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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल व लोकल सर्कल्स का दावा, देश में घुसखोरी नौ फीसद बढ़ी

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के साथ मिलकर लोकल सर्कल्स ने बुधवार 10 अक्टूबर को भ्रष्टाचार का स्तर और नागरिकों की इस बारे में राय पर ‘इंडिया करप्शन सर्वे 2018’ नाम से रिपोर्ट जारी किया है। इसमें दावा किया गया है कि देश में रिश्वतखोरी बढ़ी है। बीते साल देश के 45 फीसद नागरिकों ने रिश्वत दी थी लेकिन इस साल 54 फीसद नागरिकों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कहीं न कहीं रिश्वत दी। देश के 215 शहरों में रहने वाले 50000 नागरिकों ने इस सर्वें में भाग लिया। जिनमें 33 फीसद महिलाएं थी और 67 फीसद पुरुष थे। इनमें महानगर-प्रथम श्रेणी शहरों से 45 फीसद, द्वितीय श्रेणी शहरों से 34 फीसद और तृतीय श्रेणी और ग्रामीण क्षेत्रों से 21 फीसद लोगों शामिल हुए थे।

यह सर्वे खास कर ऐसे समय में जारी किया गया है जब पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार एक मुद्दा अहम मुद्दा बना हुआ है। भारतीय संसद ने नया भ्रष्टाचार निवारण (संशोधित) अधिनियम, 2018 पारित किया है। इसमें यह दावा किया गया है कि यह देश में भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था को बदल कर रख देगा। दूसरी ओर विश्व की नियामक कई संस्थाएं यह आगाह कर चुकी हैं कि किस तरह से भ्रष्टाचार निवेश में बाधा डालता है। यह व्यापार को सीमित करता है और आर्थिक विकास कम करता है, सरकारी व्यय से संबंधित तथ्यों और आंकड़ों को तोड़ता और मरोड़ता है।

इस सर्वेक्षण का केंद्र बिंदु, आम आदमी के दैनिक जीवन और बुनियादी जरूरतों को पूरा करते वक्त उनके सामने आने वाली मुश्किलों पर ध्यान केंद्रित करना था। इसमें बड़े भ्रष्टाचारों के किसी भी पहलू को संबोधित नहीं किया गया है।

नागरिकों ने माना भ्रष्टाचार-निरोधक हेल्पलाइन नहीं
सर्वे एजंसी ने कहा कि हमारे सर्वेक्षण के परिणाम दिखाते हैं कि आम नागरिक भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दों के बारे में ज्यादा जागरूक होते जा रहे हैं जो निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है। सर्वेक्षण के मुताबिक 58 फीसद नागरिकों ने कहा कि उनके राज्यों में भ्रष्टाचार-निरोधक हेल्पलाइन नहीं है। जबकि 33 फीसद ने कहा कि उनके राज्य में ऐसी किसी हेल्पलाइन के होने के विषय में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। पिछले साल नागरिकों की ओर से पुलिस अधिकारियों को सबसे ज्यादा रिश्वत दी गई। जिसके बाद नगर निगम, संपत्ति पंजीकरण और अन्य अधिकारियों (बिजली विभाग, परिवहन कार्यालय, कर कार्यालय आदि) को दी गई।

सीसीटीवी कैमरे बने अपराधियों के लिए रुकावट
सीसीटीवी कैमरों का होना अपराधियों के लिए रुकावट बन गया है क्योंकि केवल 13 फीसद नागरिकों ने उन सरकारी कार्यालयों में रिश्वत दी है जहां सीसीटीवी लगे हुए थे। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया और लोकल सर्कल्स ने अपने सर्वेक्षण के द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक कानून में हाल ही में हुए बदलावों के बारे भारतीय नागरिकों की राय लेने की कोशिश की है।

63 फीसद को लगता है नया कानून बढ़ाएगा परेशानी
लगभग 63 फीसद को लगता है कि नया संशोधित कानून, सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा लोगों के उत्पीड़न को बढ़ा देगा क्योंकि कानून, अधिकारियों के हाथ में उन लोगों को भी परेशान करने का साधन देगा जो ईमानदार हैं। इसके अलावा 49 फीसद नागरिकों ने कहा कि किसी भी सरकारी अधिकारी की जांच करने के पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व स्वीकृति लेना आवश्यक होने से रिश्वत और भ्रष्टाचार में वृद्धि होगी क्योंकि इससे भ्रष्ट अधिकारियों पर तुरंत मुकदमा चलाना मुश्किल हो जाएगा।

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