ताज़ा खबर :
prev next

वॉटर री-साइकिलिंग उद्योग – संभावनाएं बहुत हैं मगर जरूरत है बड़ी सरकारी मदद की

भारत दुनिया भर में ताज़े पानी की सबसे ज्यादा खपत करने वाला देश है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ताज़े पानी की हर साल 750 बिलियन क्यूबिक मीटर खपत होती है। विश्व के उपलब्ध ताज़े पानी के भंडारों में से भारत में सिर्फ 4% भंडार ही उपलब्ध हैं जबकि विश्व की 17% जनसंख्या भारत में रहती है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार वर्ष 2030 तक भारत में पीने के योग्य पानी की मांग बढ़कर 1.5 ट्रिल्यन क्यूबिक मीटर प्रतिवर्ष हो जाएगी। पानी की निरंतर बढ़ती यह मांग जहां केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक बड़ा सरदर्द बन रही है। विशेषज्ञों की राय में इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है पानी को री-साइकिल कर उसे दुबारा उपयोग के योग्य बनाना। दुर्भाग्य से भारत में पानी को री-साइकिल करने की दिशा में ज्यादा काम नहीं हो रहा है।

क्या है वर्तमान स्थिति
हमारे देश में ताज़े पाने के नए-नए स्रोतों को खोजने के विषय में अभी जागरूकता की भारी कमी है। अकसर कहा जाता है कि हमारे देश में भारत के असीमित भंडार उपलब्ध हैं, जबकि हकीकत अब इसके ठीक विपरीत है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 तक प्रति व्यक्ति साफ पानी की उपलब्धता घट कर 1,100 क्यूबिक मीटर रह जाएगी, जबकि वर्ष 2001 में यह 1,800 क्यूबिक मीटर प्रतिवर्ष थी। दूसरी ओर घरों से निकलने वाले पानी को बेकार में ही बहा दिया जाता है। जबकि इस पानी को री-साइकिल कर इसे दुबारा उपयोग में लाया जा सकता हैं। हालांकि बहुत से शहरों में नगर पालिकाओं ने पानी को री-साइकिल करना शुरू कर दिया है, मगर पर्याप्त धन और तकनीक के अभाव में हर रोज करोड़ों लीटर पानी बेकार में ही बहा दिया जाता है।
आपको यह जानकार ताज्जुब होका कि फिलहाल हिंदुस्तान में केवल 30% पानी ही री-साइकिल किया जाता है। हमारे देश में पानी की हो रही बरबादी का अंदाजा इनमें लगे सीवेज सिस्टम से लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए दिल्ली में 90% घरों की नालियों से निकालने वाला पानी बिना ट्रीट किए सीधे यमुना नदी में बहा दिया जाता है। वर्षों से हो रही इस लापरवाही का नतीजा है कि आज यमुना नदी की गिनती विश्व की सबसे प्रदूषित नदियों में होती है।

री-साइकिलिंग की समस्याएँ
अगर व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो पानी की री-साइकिलिंग एक बहुत ही महंगा धंधा है। सरकारों के सामने भी सबसे बड़ी समस्या वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की कीमत ही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार प्रतिदिन 1 मिलियन पानी को री-साइकिल कर दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाने की लागत लगभग 1 करोड़ रुपए आती है। स्पष्ट है कि निजी क्षेत्र के उद्यमियों के लिए बिना सरकारी मदद के यह बड़े घाटे का सौदा है। छोटे शहरों और ग्राम पंचायतों के लिए भी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए इतनी भारी-भरकम रकम जुटाना बहुत बड़ी बात है। वह भी तब जबकि ताज़ा पानी सिर्फ एक बोरवेल लगाकर उपलब्ध हो। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, गाज़ियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए उचित कीमत पर जमीन मिल पाना भी लगभग असंभव है। इसके अलावा प्लांट को चलाने के लिए स्किल्ड लेबर, री-साइकिल किए गए पानी की सप्लाई के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्लांट के लिए 24 घंटे बिजली की सप्लाई जैसे अनेक मसले हैं जो बिना सरकारी मदद के नहीं सुलझाए जा सकते हैं।

समाधान की ओर बढ़ते कदम
वॉटर री-साइकिलिंग के क्षेत्र में भारत की गिनती भले ही विश्व के सबसे पिछड़े देशों में होती हो, मगर अच्छी बात यह है कि हमारी सरकारों ने वर्ष 2004 से ही इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया था। 2014 के बाद स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने शौचालयों के कारण शहरों और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में काफी सुधार आया है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार भारत में सैनिटेशन और वॉटर री-साइकिलिंग उद्योग का वार्षिक टर्नओवर लगभग 420 मिलियन डालर है जोकि प्रति वर्ष 18% की गति से बढ़ रहा है। महानगरों में कूड़ा प्रबंधन के क्षेत्र में निजी कंपनियों के आगमन से वॉटर री-साइकिलिंग के क्षेत्र में भी संभावनाएं बढ़ी हैं। बहुत से महानगरों में शहर की सीमा से सटे गांवों में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा बहुत सस्ते दामों पर जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। इस काम में बहुत सी बहुराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाएं भी राज्य सरकारों और नगर पालिकाओं की आर्थिक रूप से मदद कर रही हैं।
कुल मिलाकर लब्बोलुबाब यह है कि यदि हमने अभी सही कदम नहीं उठाए तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपने दैनिक जीवन में पानी की बड़ी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना होगा।

व्हाट्सएप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

हमारा न्यूज़ चैनल सबस्क्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Follow us on Facebook http://facebook.com/HamaraGhaziabad
Follow us on Twitter http://twitter.com/HamaraGhaziabad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *