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सीबीआई डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने लगाए डाइरेक्टर आलोक वर्मा पर गंभीर आरोप

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो वरिष्ठतम अधिकारियों के बीच आपसी विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। चार साल पहले विवादास्पद मांस निर्यातक मोइन कुरेशी के यहाँ इन्कम टैक्स की पड़ी रेड के बाद से सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना और डायरेक्टर आलोक वर्मा के बीच संबंध काफी खराब चल रहे हैं।
अपनी बेबाक छवि के लिए मशहूर राकेश अस्थाना ने मोइन कुरेशी के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत एकत्र सीबीआई के केस को बहुत मजबूत कर दिया था। अस्थाना ने आरोप लगाया है कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा कुरेशी समेत कई महत्वपूर्ण मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी का पक्ष कमजोर कर रहे हैं। जबकि सीबीआई का कहना है कि उसे अस्थाना और हैदराबाद के एक व्यवसायी के बीच हुई एक कथित बातचीत का टेप मिला है जिसमें पैसों के लेनदेन की बात की गई है। इसी आधार पर पिछले हफ्ते सीबीआई ने राकेश अस्थाना के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज कराई है।
इस मामले में मीडिया में मौजूद तथ्यों का अध्ययन करने से पता चलता है कि अस्थाना और सीबीआई डॉयरेक्टर आलोक वर्मा मोइन कुरैशी केस के एक पहलू पर एक दूसरे से असहमत थे। सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा चाहते थे मोइन कुरेशी केस में चारों आरोपियों को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने से पहले सीबीआई अभियोजन पक्ष के निदेशक (डीओपी) मामले का अध्ययन कर लें। वहीं, अस्थाना ने 3 अक्टूबर 2018 ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले लगभग सभी सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि जांच से जुड़े अन्य पहलुओं को सामने लाने के लिए चारों आरोपियों (मोइन कुरेशी, प्रदीप कोनेरु, आदित्य शर्मा और सतीश साना) से पूछताछ जरूरी है।
अब सीबीआई में नंबर दो की हैसियत रखने वाले स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा समेत कई अन्य उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अस्थाना ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव से एक “अति-गोपनीय” शिकायत में कई केसों का जिक्र किया है।
इन केसों में मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ जांच से संबंधित मामला, सेंट किट्स सिटिजनशिप की मांग करने वाले दो व्यवसायियों और हरियाणा में भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मामला शामिल है।
अँग्रेजी अखबार इंडियन एक्स्प्रेस के अनुसार 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा को लिखे पत्र में अस्थाना ने कहा कि उन्हें सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों पर जवाब देने को कहा गया था। ऐसा उन्होंने 16 जुलाई को ही कर दिया था। अस्थाना ने आगे कहा कि सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यों से संबंधित उन्हें अपने सूत्रों से कुछ संवेदशनशील जानकारियां मिली है। चूकि, संगठन के उच्च अधिकारियों के खिलाफ जानकारी को देखने के लिए कोई तंत्र नहीं था, इसलिए वे इन जानकारियों को उनसे साझा कर रहे हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से जुड़े मामलों सहित अस्थाना ने सीबीआई प्रमुख और अन्य अधिकारियों पर कई तरह के आरोप लगाए हैं।
अस्थाना ने कहा कि, “हैदराबाद स्थित कारोबारी साना सतीश बाबू (मोइन कुरैशी के खिलाफ चल रही जांच में आरोपी) ने सीबीआई द्वारा कार्रवाई से बचने के लिए सीबीआई निदेशक वर्मा को 2 करोड़ रुपये का रिश्वत दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 फरवरी को वर्मा द्वारा टेलीफोन पर साना की जांच न करने का निर्देश दिया गया था।” संयोग से, यह वही मामला है जिसमें अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें उन्हें रिश्वत स्वीकार करने वाले व्यक्ति के रूप में नामित किया है। जैसा कि रविवार को द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा रिपोर्ट किया गया था, 15 अक्टूबर को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 4 अक्टूबर को साना ने एफिडेविट दिया था कि अस्थाना और अन्य ने सीबीआई की कार्रवाई रोकने के लिए 3 करोड़ रुपये का रिश्वत लिया था।
अस्थाना ने अगला आरोप यह लगाया है, “खुफिया एजेंसियों द्वारा सीबीआई निदेशक को सूचित किया गया था कि सीबीआई केस का सामना करने वाले दो व्यवसायी सेंट किट्स की नागरिकता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन एजेंसी ने पासपोर्ट रद्द करने या लुक आउट नोटिस जारी करने जैसी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि एक व्यवसायी को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में नामित किया गया है। दूसरे कि खिलाफ 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में मनी लॉन्डरिंग के लिए जांच की जा रही है।”
राकेश अस्थाना ने आगे लिखा, “हरियाणा भूमि अधिग्रहण के मामले में प्रारंभिक जांच के रजिस्ट्रेशन के बाद राज्य के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिकारियों के साथ-साथ रियल एस्टेट एजेंटों की रिपोर्टें सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार शर्मा और वर्मा के साथ जुड़ी हुई थीं।” अस्थाना की शिकायत में जांच बंद करने के लिए 36 करोड़ रुपये लेने का आरोप है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जांच वास्तव में बंद हुई या नहीं? अस्थाना ने पिछले साल से सीबीआई मामले में कई गड़बडि़यों को लिखा, जिसमें ईडी के सहायक निदेशक को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ने का मामला भी शामिल है। पत्र में कहा गया है कि इन मामले के कारण सीबीआई की लखनऊ इकाई के प्रमुख को डायरेक्टर ने गंभीर रूप से फंसाया था, जिन्हें बाद में राहत मिली। इसके साथ ही अस्थाना ने कई और गंभीर आरोप लगाए हैं।

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