ताज़ा खबर :
prev next

कामयाबी या लापरवाही – सरेआम चल रहा था मानव तस्करी का व्यापार, बेखबर रही गाज़ियाबाद पुलिस

सोमवार शाम पाँच बजे इंदिरापुरम क्षेत्र के न्याय खंड-2 में स्थित सृजन विहार सोसायटी में दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस की सहायता से छापेमारी की और मानव तस्करी के लिए लाई गई 28 लड़कियों को मुक्त कराया। सोसायटी के फ्लैट संख्या सी-5 और डी-24 में हुई इस छापेमारी में पाँच तस्कर भी पकड़े गए जो नेपाली मूल के थे।
सूत्रों के अनुसार इन लड़कियों को तीन महीने पहले यहाँ लाकर रखा गया था। रविवार को कैद की गई लड़कियों में से दो लड़कियां किसी तरह से भागने में कामयाब हुईं और दिल्ली की गीता कॉलोनी में रहने वाले रिश्तेदार के यहाँ पहुंची। रिश्तेदार ने दिल्ली पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी और फिर उसके बाद छापेमारी की कार्यवाही की गई। गाज़ियाबाद के एसएसपी वैभव कृष्ण के अनुसार गिरफ्तार किए गए मानव तस्करों में शामिल केदारनाथ ने बताया कि वह नेपाल से लड़कियों को लाकर खाड़ी के देशों में भेजता था और इसके लिए उसे प्रति लड़की पाँच हज़ार रुपये मिलते थे।
आश्चर्य की बात है कि दिल्ली पुलिस को मिली सूचना के आधार पर हुई इस कार्यवाही के लिए गाज़ियाबाद पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। जबकि इंदिरापुरम पुलिस के लिए इससे बड़ी नाकामयाबी की बात क्या होगी कि पिछले तीन महीने से उसकी नज़रों के सामने मानव तस्करों का गिरोह सक्रिय था और उसे भनक तक नहीं पड़ी! सोसायटी में रहने वाले लोगों और वहाँ की रेसिडेंट वेलफ़ेयर एसोसेशियन की भूमिका भी संदेहास्पद है। ऐसा कैसे संभव है कि सोसायटी के दो घरों में एक साथ 25 लड़कियां और 5 तस्कर रह रहे हों और पड़ोसियों को खबर तक न चले? इन दो घरों में पिछले तीन महीनों से 25 लोगों के लिए राशन भी आ रहा होगा मगर इसकी भनक एलआईयू को नहीं थी! इसे आप पुलिस के सूचना तंत्र की नाकामी नहीं तो और क्या कहेंगे?
दुर्भाग्य से हमारा गाज़ियाबाद मानव तस्करी का गढ़ बना हुआ है। लोनी क्षेत्र के बारे में तो मशहूर है कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में देह व्यापार के धंधे में फंसी लड़कियां अपने जीवनकाल में कभी न कभी लोनी में जरूर रही होंगी। कहने की जरूरत नहीं कि इतने बड़े स्तर पर हो रही मानव तस्करी बिना स्थानीय पुलिस के सहयोग के संभव नहीं है।
उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद लगा था कि हमारे गाज़ियाबाद के भी हालत बदलेंगे। नई सरकार ने प्रयास भी किए हैं, जिसका परिणाम है कि गाज़ियाबाद को डीएम रितु माहेश्वरी, एसएसपी वैभव कृष्ण, जीडीए वीसी कंचन वर्मा और नगरायुक्त चंद्र्प्रकाश सिंह जैसे कर्तव्यनिष्ठ अफसर मिले हैं। लेकिन पुलिस और प्रशासन में निचले स्तर व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते शायद इन आला अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा और काम के प्रति समर्पण बेअसर साबित हो रहा है। साथ ही अपराधियों को लगातार मिल रहे राजनैतिक संरक्षण से स्पष्ट है कि प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद भी कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ है, सिर्फ अपराधियों और दलालों के चेहरे बदले हैं।

व्हाट्सएप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

हमारा न्यूज़ चैनल सबस्क्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Follow us on Facebook http://facebook.com/HamaraGhaziabad
Follow us on Twitter http://twitter.com/HamaraGhaziabad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *