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अतिक्रमणकारियों के सामने जिला प्रशासन के हौसले पस्त, बीएसआर औद्योगिक क्षेत्र से बैरंग लौटी टीम

बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए आधी-अधूरी तैयारियों के साथ पहुंची जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम को झुग्गी वासियों के विरोध के कारण बैरंग लौटना पड़ा। यहाँ के उद्यमी पिछले काफी समय से औद्योगिक क्षेत्र में बनी अवैध झुग्गियों को हटाने की मांग कर रहे हैं। सितंबर माह में हुई उद्योग बंधु बैठक में जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने गाज़ियाबाद नगर निगम को आदेश दिये थे कि आगामी बैठक से पहले अतिक्रमण को साफ कर दिया जाए।
एसडीएम प्रशांत तिवारी के नेतृत्व में पुलिस, प्रशासन और निगम की टीम औद्योगिक क्षेत्र में पहुंची तो उन्हें झुग्गीवासियों ने चारों ओर से घेर लिया। झुग्गी में रहने वालों का नेतृत्व कर रहे नदीम ने जिला प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें एक ईंट भी गिराने का मौका नहीं दिया जाएगा। नदीम का कहना है कि प्रशासन को झुग्गियाँ हटाने से पहले यहाँ रहने वाले लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। यदि जिला प्रशासन या नगर निगम पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना झुग्गियों को गिराने के प्रयास किए तो उन्हें जनाक्रोश का सामना करना होगा।
निगम और प्रशासन के विरुद्ध लोगों के गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भीड़ में मौजूद कुछ लोग सरेआम एसडीएम प्रशांत तिवारी और नगर निगम के ज़ोनल ऑफिसर हरिकिशन गुप्ता को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते नज़र आए और मौके पर मौजूद पुलिस उनका मुंह ताकती रही। अंततः झुग्गीवासियों और जिला प्रशासन के बीच हुए मौखिक समझौते के तहत यह तय हुआ है कि 9 नवंबर तक लोग सड़क के 12 फुट तक का अतिक्रमण खुद हटा लेंगे अन्यथा प्रशासन उन पर कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
स्थानीय पार्षद आनंद चौधरी का कहना है कि अवैध रूप से बनी झुग्गियों को ध्वस्त किया जाना चाहिए लेकिन इस अभियान को केवल झुग्गियों तक सीमित न रखकर अतिक्रमण करने वाले उद्यमियों और व्यापारियों के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए। चौधरी ने बताया कि लोहा मंडी में लोहा व्यापारी अपना सारा व्यापार पार्कों और सड़कों से ही चला रहे हैं। इस प्रकार औद्योगिक क्षेत्र में भी उद्यमियों ने फैक्ट्रियों के बाहर कच्चा माल और कबाड़ डाल कर अतिक्रमण किया हुआ है। कई फ़ैक्टरियों के बाहर नाले-नालियों पर लेंटर डाल कर साइकिल स्टेंड बनाए हुए हैं जिससे निगम कर्मचारियों को नाले साफ करते समय काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
देखा जाए तो अतिक्रमण की इस समस्या के लिए झुग्गियों में रहने वाले लोग, UPSIDC, उद्यमी, जिला प्रशासन और नगर निगम सभी संयुक्त रूप से दोषी हैं। आज से कई साल पहले यहाँ जब लोगों ने यहाँ झुग्गियाँ बना कर रहना शुरू किया था तो न तो उद्यमियों ने इसका विरोध किया और न ही उन्हें हटाने के लिए UPSIDC, निगम और जिला प्रशासन की ओर से कोई प्रयास किए गए। इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों के रूप में उद्यमियों को सस्ती लेबर मिलती रही और धीरे-धीरे झुग्गियों की संख्या भी बढ़ती रही। निगम की लापरवाही का तो आलम यह है कि अवैध झुग्गियों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए उसने यहाँ शौचालय तक बनवा दिए हैं। इसी प्रकार इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों के बने आधार कार्ड और राशन कार्ड अतिक्रमण को प्रशासन और राजनेताओं से मिले समर्थन का सबूत हैं।
आज जब झुग्गियों की संख्या काबू से बाहर हो गई है और झुग्गियों में रहने वाले असमाजिक तत्वों से उद्यमियों को परेशानी हो रही है तो वे प्रशासन पर झुग्गियाँ हटाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। यदि प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन शहरी क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के प्रति गंभीर है तो उसे एक व्यापक नीति बनाकर प्रयास करने होंगे। वरना आज हुई घटना की तर्ज पर प्रशासन अतिक्रमण हटाने की योजना बनाता रहेगा और फिर लोगों व नेताओं के दबाव में आकर अभियान को किसी अगली तारीख के लिए टालता रहेगा।

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