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फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट की वजह अब नहीं होगी देरी, डीजीपी ने निवाड़ी में किया लैब का उद्घाटन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट की वजह से अब किसी अपराधी को सजा दिलाने में देर नहीं होगी। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने आज गाज़ियाबाद में नवनिर्मित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री का उद्घाटन किया। इस प्रयोगशाला में अभी 7 अनुभाग खोले गए हैं जबकि आने वाले कुछ दिनों में 8 अनुभाग और भी खोले जाएंगे।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला यह उत्तर प्रदेश की पाँचवीं प्रयोगशाला है। इससे पहले लखनऊ वाराणसी आगरा और मुरादाबाद में इस तरह की प्रयोगशाला चल रही है। लेकिन अन्य प्रयोगशालाओं के मुक़ाबले गाज़ियाबाद की यह प्रयोगशाला काफी हाईटेक है। यहां से डीएनए टेस्ट के साथ-साथ नार्को टेस्ट कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रयोगशाला में कुल 17 वैज्ञानिक काम करेंगे जबकि इन के साथ कुल 174 का स्टाफ काम करेगा।
मेरठ रेंज में होने वाली घटनाओं की फॉरेंसिक जांच अभी तक आगरा और मुरादाबाद सैंपल भेजे जाते रहे हैं। जिसकी रिपोर्ट आने में महीनों और कभी-कभी साल भी लग जाते थे। इस वजह से अपराधी को सजा दिलाने में काफी देरी हो जाती थी। इसलिए, प्रयोगशाला में खासतौर पर पोक्सो एक्ट से जुड़ी सभी सैंपल्स को फास्ट ट्रेक पर जांच करने की व्यवस्था की गई है ताकि रेप और गैंगरेप की घटना करने वाले अपराधियों को फास्ट ट्रैक के तहत सजा दिलाई जा सके। इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस और साइबर क्राइम की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
गाजियाबाद के निवाड़ी इलाके में बने इस प्रयोगशाला में ₹60 करोड़ की लागत आई है, जबकि अभी ₹17 करोड़ की और जरूरत है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 18 रेंज हैं जिसमें से यह पाँचवीं प्रयोगशाला बनाई गई है। 13 रेंज पर अभी इस तरह की प्रयोगशाला खोलने की प्रक्रिया चल रही है। गाजियाबाद के बाद अब इलाहाबाद में इस तरह की प्रयोगशाला खोली जाएगी।

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