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शत्रुओं के शेयर बेच कर सरकार जुटाएगी तीन हज़ार करोड़ रुपए

केंद्र सरकार ने आर्थिक सुधारों और देश में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए गुरुवार को चार महत्वपूर्ण फैसले किए। इनमें तीन हजार करोड़ रुपये मूल्य के शत्रु शेयरों (एनमी शेयर) को बेचना, देश के 6 हवाई अड्डों को निजी और सार्वजनिक मॉडल (पीपीपी) के तहत लाना, ड्रेजिंग कार्पोरेशन के पूर्ण विनिवेश की सैद्धांतिक मंजूरी देना और देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने के निर्णय शामिल हैं।
मंत्रिमंडल में लिये फैसलों की जानकारी देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि देश में तीन हजार करोड़ रुपये के ‘शत्रु शेयर’ बेकार पड़े हैं। पाकिस्तान चले गए लोगों की चल अचल संपत्ति सरकार के स्वामित्वने के लिए बनाए गए कानून के तहत अब इन शेयरों को बेचने का फैसला किया गया है। इससे मिली धनराशि को आधारभूत ढांचे के विकास के लिए उपयोग में लाया जाएगा। शेयरों की संख्या 6 करोड़ 50 लाख है तथा यह 996 कंपनियों से संबंधित हैं। रविशंकर के अनुसार वर्ष 1968 के मूल्यों पर इनकी कीमत तीन हजार करोड़ रुपये थी, जो आज इससे कई गुना अधिक बढ़ गई होगी।
सरकार ने आज देश के छह हवाई अड्डों अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलौर को पीपीपी मॉडल के तहत संचालन, प्रबंधन और विकास के लिए सौंपने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोच्चि के हवाई अड्डों को पीपीपी के तहत लाया गया था, जिसके बहुत अच्छे परिणाम निकले हैं। यह परिणाम गुणवत्ता की दृष्टि से दुनिया के सबसे अच्छे हवाई अड्डों में शामिल हो गए हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब छह अन्य हवाई अड्डों को भी पीपीपी मॉडल के तहत शामिल करने का फैसला किया है।
रविशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं कि हवाई चप्पल पहनने वाला आदमी भी हवाई यात्रा करें। सरकार ने इस दिशा में जो कदम उठाए हैं, उनके अच्छे नतीजे सामने आए हैं तथा आज का फैसला भी उसी की एक कड़ी है। आर्थिक सुधारों की दिशा में एक अन्य पहल करते हुए सरकार ने नदियों और समुद्री क्षेत्र में गाद निकालने के काम में लगे ड्रेजिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया में पूर्ण विनिवेश का सैद्धांतिक फैसला किया है। इस कार्पोरेशन में इस समय सरकार के शेयर 73 प्रतिशत हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के इस कार्पोरेशन में अब शत प्रतिशत विनिवेश करने का फैसला किया गया है। ये शेयर विशाखापट्टनम, पारादीप, जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और कांडला पोर्ट ट्रस्ट के कंसोर्टियम को बेचे जाएंगे।
आर्थिक सुधारों से ही जुड़े एक अन्य फैसले में सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों के रणनीतिक भंडार की स्थापना के लिए विदेशी कंपनियों की भागीदारी शुरू करने फैसला किया है। ऐसा एक रणनीतिक भंडार कर्नाटक के पदूर में स्थापित किया जाएगा, जिसकी बोली प्रक्रिया में विदेशी कंपनियां भाग ले सकेंगी। सरकार को इससे 10 हजार करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

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