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गाज़ियाबाद को छोड़ एनसीआर क्षेत्र में शुरू हुई बंद इकाइयां , परेशान उद्यमियों में भारी रोष

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक स्थिति में है। ऐसे हालातों को देखते हुए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सिफ़ारिश पर पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों, कोयले और बायोमास पर आधारित उद्योगों को 12 नवंबर तक बंद करने के आदेश दे दिए थे। हालांकि दिल्ली और एनसीआर के अन्य शहरों में आज यह रोक उठा ली गई, मगर गाज़ियाबाद जिले में यह रोक 15 नवंबर तक जारी रहेगी।
जिला प्रशासन की इस अनदेखी और उद्यमियों के प्रति असंवेदनशीलता को लेकर स्थानीय उद्यमियों में काफी रोष है। उद्यमियों का कहना है कि हम पर्यावरण के प्रति सजग है और ज़्यादातर उद्यमियों ने प्रदूषण को सीमित मात्र में रखने के लिए सरकार द्वारा सुझाए गए उपकरण लगाए हुए हैं। इसके बावजूद भी कभी एनजीटी तो कभी सीपीसीबी/यूपीसीबी औद्योगिक उत्पादन को बंद करने के आदेश दे देता है। इसकी चपेट में वे उद्यमी ही आते हैं जो उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकृत हैं। जबकि वायु प्रदूषण के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार वे उद्योग हैं जो कहीं भी पंजीकृत नहीं हैं और सरकारी अधिकारियों को सुविधा शुल्क देकर कानून के दायरे से बचे हुए हैं।
आपको बता दें कि गाज़ियाबाद जिले में लगभग 200 इकाइयां ईपीसीए के इस आदेश से प्रभावित हुई हैं। इनमें कई ऐसी बड़ी इकाइयां भी शामिल हैं जो हर साल सैंकड़ों करोड़ रुपए के उत्पाद निर्यात करती हैं। केवल गाज़ियाबाद जिले में लगे इस अनावश्यक प्रतिबंध की वजह से ऐसे उद्यमियों की साख को बट्टा तो लग ही रहा है साथ ही इन इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों के समक्ष भी रोजीरोटी का संकट पैदा हो गया है।

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