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राफेल डील पर सुनवाई – 1985 के बाद भारतीय वायुसेना ने नहीं खरीदा कोई लड़ाकू विमान

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा वायुसेना के लिए खरीदे 36 राफेल विमानों की खरीद से जुड़े दस्तावेजों पर सुनवाई चल रही है। ये दस्तावेज़ सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को एक सील बंद लिफाफे में सौंपे थे। मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसके कौल एवं न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ कर रही है।
सुनवाई के दौरान भारतीय वायुसेना के अधिकारी ने कहा, हमें पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट चाहिए। उन्होंने कहा कि 1985 में मिराज के बाद से वायु सेना ने कोई एयरक्राफ़्ट बेड़े में नहीं जोड़ा गया। वहीं केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मामला एक्सपर्ट का है कोर्ट को इसे डील नहीं करना चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, कीमत का खुलासा करने से दुश्मन को विमान की खासियतें पता लग सकती है, इसलिए कीमत का खुलासा नहीं किया गया।
इससे पहले आज शीर्ष अदालत ने कहा, वायुसेना का अधिकारी कोर्ट में होना चाहिए और हम उनकी रिक्वायरमेंट के बारे में विचार कर रहे हैं। रक्षा सचिव मौजूद होने पर कोर्ट ने कहा कि हमें मंत्रालय का अधिकारी नहीं चाहिए, सेना अधिकारी को बुलाया गया है। वहीं अरुण शौरी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हमें इस मामले में विमानों कि कीमत से आगे जाना चाहिए क्योंकि यह देश की सुरक्षा के साथ समझौता है क्योंकि एयरक्राफ्ट की संख्या घटा दी गई है। अरुण शौरी ने सु्प्रीम कोर्ट में कहा, पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को राफेल डील के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा था कि यह पीएम मोदी का फैसला है मैं इसका समर्थन करता हूं, किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

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