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इसरो को मिली एक और सफलता, GSAT-11 की बदौलत अब ब्रॉड बैंड स्पीड बढ़ जाएगी कई गुना

आज सुबह फ्रांस के फ्रेंच गुयाना में एक एरिएयनस्पेस रॉकेट की मदद से भारत के सबसे वजनी सैटेलाइट जीसैट-11 को सफलतापूर्वक लॉंच कर दिया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी देते हुए बताया कि जीसैट-11 की लॉन्चिंग से देश में ब्रॉडबैंड सेवा को और बेहतर बनाया जाएगा। इस 5854 किलोग्राम वजनी जीसैट की लागत करीब 500 करोड़ रुपए आई है। दरअसल यह इसरो के इंटरनेट बेस्ड सैटेलाइट सीरीज का हिस्सा है। इसका मकसद इंटरनेट स्पीड को बढ़ाना है। इसके तहत अंतरिक्ष में 18 महीने में तीन सैटेलाइट भेजे जाने हैं। पहला सैटेलाइट जीसैट-19 बीते साल जून में भेजा जा चुका है। जीसैट-11 को जल्द लॉन्च करने की तैयारी है। इसके बाद जीसैट-20 को साल के आखिरी तक भेजने की योजना है। ये तीनों मल्टीपल स्पॉट बीम टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे।
दक्षिण अमेरिका के पूर्वोत्तर तटीय इलाके में स्थित फ्रांस के अधिकार वाले भूभाग फ्रेंच गुयाना के कौरू में स्थित एरियन प्रक्षेपण केन्द्र से भारतीय समयानुसार तड़के दो बजकर सात मिनट पर रॉकेट ने उड़ान भरी। एरियन-5 रॉकेट ने बेहद सुगमता से करीब 33 मिनट में जीसैट-11 को उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया। एजेंसी ने बताया कि करीब 30 मिनट की उड़ान के बाद जीसैट-11 अपने वाहक रॉकेट एरियन-5 से अलग हुआ और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित हुआ। यह कक्षा उपग्रह के लिए पहले से तय कक्षा के बेहद करीब है।
ISRO के प्रमुख के. सिवन ने सफल लॉन्चिंग के बाद कहा, ‘‘भारत द्वारा निर्मित अब तक के सबसे भारी, सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली उपग्रह का एरियन-5 के जरिये आज सफल प्रक्षेपण हुआ।’’ उन्होंने कहा कि जीसैट-11 भारत की बेहरीन अंतरिक्ष संपत्ति है। इसरो द्वारा बनाए गए इस सैटेलाइट का वजन करीब 5,854 किलोग्राम है। यह अत्याधुनिक और अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है जिसे इसरो के आई-6 के बस के साथ कनफिगर किया गया है। इसका जीवन काल 15 साल या उससे ज्यादा होने का अनुमान है।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जीसैट-11 के एरियन-5 से अलग होने के बाद कर्नाटक के हासन में स्थित इसरो की मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी ने उपग्रह का कमांड और नियंत्रण अपने कब्जे में ले लिया। एजेंसी के मुताबिक जीसैट-11 बिलकुल ठीक काम कर रहा है। सैटेलाइट को फिलहाल जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। आगे वाले दिनों में धीरे-धीरे करके चरणबद्ध तरीके से उसे जियोस्टेशनरी (भूस्थिर) कक्षा में भेजा जाएगा। जियोस्टेशनरी कक्षा की ऊंचाई भूमध्य रेखा से करीब 36,000 किलोमीटर होती

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