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फर्जी डॉक्टर की लापरवाही से हुई 24 वर्षीय युवती की दर्दनाक मौत, जानिए कैसे

दिल्ली के मधु विहार इलाके में एक झोलाछाप महिला डॉक्टर की लापरवाही से 24 साल की एक युवती की दर्दनाक मौत हो गई। उनके पांव में एक साइकल रिक्शे की टक्कर से मामूली चोट लगी थी। आरोप है कि वहां फर्स्ट एड क्लीनिक चलाने वाली एक डॉक्टर ने युवती के प्राथमिक उपचार में इस कदर लापरवाही बरती कि उनके पूरे शरीर में सेप्टिक फैल गया। चोट लगने के 12वें दिन उनकी जान चली गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार सेप्टिक फैलने के दौरान युवती को डॉ. हेडगेवार और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी भर्ती कराया गया। आरोप है कि डॉ. हेडगेवार अस्पताल में सही इलाज नहीं मिला। आखिर में राम डॉ. मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। वहां फौरन ऑपरेशन करके युवती के पैर का एक हिस्सा काटा गया, लेकिन हालत बिगड़ती ही गई। दो दिन आईसीयू में भर्ती रहने के बाद मौत हो गई।
पीड़ित युवती का नाम भारती था। घर कृष्णा नगर के घोंडली इलाके में है। भारती M.Com कर चुकी थीं। उसके बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। मामूली चोट के कारण बेटी की मौत होने से उनके परिजन सदमे में हैं। उनके पिता अशोक कुमार ने प्राथमिक उपचार करने वाली कथित डॉक्टर के खिलाफ दिल्ली मेडिकल काउंसिल में शिकायत की। जांच में सबसे हैरान करनी बात यह सामने आई कि आरोपी महिला का एमबीबीएस होने का दावा झूठा और रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी है। इस बिनाह पर पुलिस को शिकायत की गई। दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने भी पुलिस को रिपोर्ट सौंप दी।
डीसीपी (ईस्ट) पंकज सिंह ने बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ मधु विहार थाने ने फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की धाराओं (आईपीसी 419/420) के अलावा दिल्ली मेडिकल काउंसिल ऐक्ट की धारा-27 के तहत केस रजिस्टर कर लिया है। फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, भारती 12 अप्रैल की दोपहर हसन पुर डिपो के पास अपनी सहेली के घर जा रही थीं। रास्ते में एक रिक्शे से उनके पांव में एक कट लग गया, जिससे खून निकलने लगा। उन्होंने अपनी सहेली को कॉल करके मदद के लिए बुलाया। उनकी सहेली अपने भाई के साथ मौके पर पहुंची। वे भारती को नजदीक स्थित एक क्लीनिक पर ले गए जहां कथित डॉक्टर ने टांके लगाए, इंजेक्शन दिए और दवाएं देकर घर भेज दिया।
भारती के पिता का कहना है कि घर पहुंचकर बेटी के पांव के साथ पेट, छाती और पूरे शरीर में तेज दर्द होने लगा। उसे दूसरे डॉक्टर के पास ले गए, जहां पता चला कि उनके घाव पर गलत तरीके से टांके लगे हैं, जिससे इंफेक्शन फैल गया है। घाव रिसने लगा था। आसपास की स्किन काली पड़ चुकी थी। 16 अप्रैल को डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले गए। उन्होंने पट्टी वगैरह करके घर भेज दिया। रात में घर में तबियत ज्यादा बिगड़ गई। पूरे शरीर में तेज दर्द के साथ उल्टियां भी होने लगीं। ऐसे में फिर इमर्जेंसी में डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले गए।
आरोप है कि वहां इलाज में लापरवाही बरती जाने लगी। पेशंट को नजरंदाज किया। ऐसे हालात में भारती को 17 अप्रैल को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने फौरन सर्जरी के लिए रैफर किया। पांव में जिस हिस्से तक घाव का इंफेक्शन फैल था, वह हिस्सा काटकर अलग कर दिया गया। उसके बाद भी तबियत बिगड़ती गई, जिसके चलते 20 अप्रैल को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। 23 अप्रैल को मृत्यु हो गई। भारती के पिता ने अपनी शिकायत में कहा है कि जिस फर्जी डॉक्टर की वजह से उनकी बेटी की जान गई है, वह समाज के लिए भी खतरा है, इसलिए उन्होंने दिल्ली मेडिकल काउंसिल और पुलिस में शिकायत की। जांच में डॉक्टर की डिग्री का दावा और रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी निकला।

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