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हड्डियाँ भले ही कमजोर हों, मगर हौसले बुलंद है युवा स्पर्श के

जन्म के बाद माता-पिता को उस बच्चे को गोद में लेने के लिए भी करीब 6 महीनों तक इंतजार करना पड़ा था क्योंकि उसके शरीर में 40 फ्रैक्चर थे। डॉक्टरों ने कहा था कि यह बच्चा दो दिन से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगा, लेकिन आज स्पर्श न सिर्फ जिंदा है, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी है। अब 15 साल के हो चुके उस बच्चे स्पर्श के शरीर में अब तक 135 फ्रैक्चर हो चुके हैं और 8-9 सर्जरी हो चुकी हैं। बावजूद इसके स्पर्श न सिर्फ बहुत अच्छा गाना गाते हैं, म्यूजिक कंपोज करते हैं बल्कि मोटिवेशन स्पीकर भी हैं। जी हां, वीलचेयर पर रहनेवाले स्पर्श अपनी बातों से दूसरों को जिंदगी जीने की सही राह दिखाते हैं। वह अब तक 6 देशों में 125 लाइव परफॉर्मेंस दे चुके हैं और कुल 7 सिंगिंग कॉम्पिटिशन जीत चुके हैं। वह यूनाइटेड नेशंस, गूगल, टेडएक्स गेटवे, गोवा फेस्ट, एनबीए के बड़े इवेंट में शो भी कर चुके हैं। स्पर्श को ग्लोबल इंडियन अवॉर्ड, चैंपियन ऑफ होप, स्पेशल अचीवर्स अवॉर्ड, इंस्पिरेशन अवॉर्ड ऑफ एक्सिलेंस, मोस्ट इंस्पायरिंग इंडीविजुअल अवॉर्ड जैसे ढेरों पुरस्कार मिल चुके हैं।
स्पर्श अब न्यू यॉर्क में रहते हैं। वह मूल रूप से गुजरात के सूरत के निवासी हैं। स्पर्श ऑर्टियाजिनेसिस इम्परफेक्टा बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें हल्के-से झटके या फिर जोर से हाथ मिलाने भर से भी हडि्डयां टूट जाती हैं। स्पर्श के हाथों में 30 और पैरों में 60 फ्रैक्चर हैं। यही वजह है कि उन्हें बिस्तर या वीलचेयर पर रहना पड़ता है। पिता हिरेन शाह कहते हैं कि जन्म के समय स्पर्श के शरीर में 40 फ्रैक्चर थे। जन्म के बाद पूरे एक साल उनकी नाक में ट्यूब लगाकर रखनी पड़ी थी क्योंकि वह कुछ भी निगल नहीं पाते थे। वह तीन साल तक हाथ में पेंसिल नहीं पकड़ पाते थे। हीरेन बताते हैं, ‘यह सब देखकर मैंने भगवान से पूछा कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों? लेकिन स्पर्श ने अपनी मेहनत और कोशिशों से आज जो जगह बनाई है, उसे देखकर मैं भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं कि उसने स्पर्श को हमारे घर भेजा। स्पर्श नाम रखने के पीछे भी एक कहानी है। यों तो यह नाम उसके जन्म से पहले ही सोच लिया था, लेकिन यह नाम बहुत स्पेशल साबित हुआ क्योंकि शुरुआत में हम उसे सिर्फ स्पर्श कर सकते थे, गोद में उठा भी नहीं पाते थे। आज वह हर किसी के दिल को छू रहा है तो यह नाम कहीं-न-कहीं सच साबित हुआ है।’
स्पर्श शुरू से ही होनहार थे। उन्होंने तीन साल की उम्र से ही की-बोर्ड सीखना और किताबें पढ़ना शुरू कर दिया था। लेकिन की-बोर्ड बजाने से भी स्पर्श को फ्रैक्चर हो गया तो इसे छोड़ना पड़ा, लेकिन संगीत से लगाव कम नहीं हुआ। उन्होंने गाना शुरू कर दिया। पैरंट्स ने भी पूरा साथ दिया और धीरे-धीरे स्पर्श ने स्टेज शो करने शुरू कर दिए। स्टेज शो से होने वाली कमाई को वह अलग-अलग संस्थाओं को दान कर देते हैं। स्पर्श उर्फ प्योर रिदम (पेन नेम) ने अभी तक कुल 30 गीत लिखे हैं और ज्यादातर का म्यूजिक भी उन्होंने खुद ही तैयार किया है। बहुत-सी कविताएं और शॉर्ट स्टोरी भी लिखी हैं। वह पिछले 9 बरसों से भारतीय शास्त्रीय संगीत और 4 बरसों से अमेरिकन वोकल म्यूजिक सीख रहे हैं।
स्पर्श के पिता न्यू यॉर्क सिटी में एक फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ऑफिस के हेड हैं। मां जिगिशा भी एक फाइनैंस कंपनी में असोसिएट डायरेक्टर हैं। मां स्पर्श को म्यूजिक में गाइड करती हैं जबकि पिता दुनिया भर में उनके कार्यक्रमों का जिम्मा संभालते हैं। छोटे भाई अनुज को स्पर्श पापा-मम्मी का दिया बेस्ट गिफ्ट मानते हैं। स्पर्श को अनुज के साथ विडियो गेम्स और चेस खेलना बहुत पसंद है। 15 साल के स्पर्श खुद को ‘आयरन मैन’ कहते हैं क्योंकि शरीर में 8 रॉड और 22 स्क्रू जो लगे हैं। ‘आयरन मैन’ कहें या ‘सुपर मैन’, यह सच है कि स्पर्श उन लाखों के लिए एक प्रेरणा हैं जो किसी न किसी वजह से शारीरिक रूप से मजबूर हैं और जिंदगी से खुद को हारा हुआ मानते हैं।
(स्रोत – नभाटा)

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