ताज़ा खबर :
prev next

उपयोगी जानकारी – क्या करें जब हो जाएँ डेबिट या क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के शिकार

अभी बुधवार की ही बात है, गाज़ियाबाद के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में काम करने वाली एक आया के बैंक खाते में से किसी ने ₹8,500 रुपये निकाल लिए, वही उसकी सारी जमा पूंजी थी। आश्चर्य की बात यह थी कि डेबिट कार्ड आया के पास ही था। वह तो अच्छा था कि उस गरीब आया ने समय रहते “हमारा गाज़ियाबाद” टीम से संपर्क कर लिया और हमने उसे शिकायत की पूरी प्रक्रिया समझा दी, वरना डिजिटल बैंकिंग के इस जमाने में हर रोज हजारों लोग फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं।
हालात यह है कि आपका कार्ड आपके पास होता है और आपके मोबाइल पर मैसेज या ई-मेल आता है कि आपके कार्ड पर 50 हजार रुपये का ट्रांजैक्शन किया गया है, वह भी 1,000 किलोमीटर दूर। ई-मेल स्पूफिंग फिशिंग या कार्ड क्लोनिंग के जरिये डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड या नेटबैंकिंग फ्रॉड हो सकता है। हम आपको फ्रॉड से तो नहीं बचा सकते हैं, लेकिन हम यह जरूर बता सकते हैं कि फ्रॉड का शिकार होने के बाद क्या करें।
जैसे ही आपको संदिग्ध लेनदेन का पता चले, आपको तत्काल अपने कार्ड जारीकर्ता या बैंक को इस बारे में सूचित करना चाहिए। आपको बैंक में औपचारिक तौर पर एक शिकायत दर्ज करानी चाहिए और कस्टमर केयर नंबर पर फोन कर कार्ड या अकाउंट को तत्काल ब्लॉक करा देना चाहिए।
कैसे दर्ज कराएं शिकायत?
अगर आपके साथ हुआ फ्रॉड नेटबैंकिंग, एटीएम ट्रांजैक्शन या किसी अन्य तरह के ट्रांजैक्शन से संबंधित है, तो आपको शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। लेकिन बैंक या कार्ड जारीकर्ता के समक्ष शिकायत दर्ज कराते वक्त आपके पास कम से कम ये डॉक्युमेंट्स जरूर होने चाहिए।
1. संबंधित बैंक का कम से कम छह महीने का बैंक स्टेटमेंट
2. कथित ट्रांजैक्शन से संबंधित आपके पास आए एसएमएस की एक कॉपी
3. बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ ले जाएं
4. तमाम डॉक्युमेंट्स के साथ अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं
साइबर वर्ल्ड में कई तरह के फर्जी ऐप मौजूद हैं। अगर आपके साथ हुआ फाइनैंशल फ्रॉड इसी तरह के किसी ऐप के जरिये हुआ है, तो उपरोक्त डॉक्युमेंट्स के अतिरिक्त उस मैलिशिलस ऐप का स्क्रीनशॉट भी ले जाएं।
कहां दर्ज कराएं शिकायत?
बैंक या कार्ड जारीकर्ता को फर्जी ट्रांजैक्शन की सूचना देने के बाद आपको अपने नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। साइबर लॉ एक्सपर्ट वकील सुनाक्षी गुप्ता ने बताया कि स्थानीय पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराएं। अगर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करती है, तो सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत कोर्ट में मामला दर्ज कराया जा सकता है।’ सुनाक्षी कहती हैं कि पुलिस थाने में आपको साइबर सेल के पास जाने को कहा जा सकता है। क्योंकि थाने में दर्ज किया गया मामला पुलिस की साइबर सेल के पास भेज दिया जाता है।’ गाज़ियाबाद पुलिस की साइबर सेल राज नगर पुलिस मुख्यालय में है और इससे जुड़े सारे मामले खुद एसएसपी ही देखते हैं।

व्हाट्सएप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

हमारा न्यूज़ चैनल सबस्क्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Follow us on Facebook http://facebook.com/HamaraGhaziabad
Follow us on Twitter http://twitter.com/HamaraGhaziabad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *