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नाटक के जरिये वीर शिवाजी के साम्राज्य स्थापित करने के प्रयासों को बखूबी दर्शाया

बृहस्पतिवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल गाज़ियाबाद में 39 वाँ दो दिवसीय वार्षिकोत्सव ‘रणबाँकुरे शिवाजी‘ प्रारम्भ हुआ। इस नाटिका में माता व गुरू रामदास द्वारा बाल्यावस्था में अंकुरित किए गए मूल्यों का चित्रण करते हुए, वीर शिवाजी द्वारा शत्रुओं से अनवरत लोहा लेकर एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने के प्रयासों को बखूबी दर्शाया गया। साथ ही, यह संदेश दिया गया कि वीरता, स्वाभिमान और
देशभक्ति से ओतप्रोत शिवाजी के चरित्र से प्रेरणा लेना विद्यार्थियों के लिए अति प्रासंगिक है।

कार्यक्रम का प्रारम्भ ‘वक्र तुंड महाकाय’ मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। लगभग 140 विद्यार्थियों केे द्वारा सप्तक गीत में विभिन्न वाद्यों के अनूठे समन्वय ने प्रकृति के सात रंगों से सजे
इन्द्रधनुष, सात ऋषियों, सात चक्र, सात स्वरों का वर्णन करने वाली अति कर्णप्रिय व सुमधुर रसधारा से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या डाॅ. ज्योति गुप्ता ने मुख्य अतिथि डाॅ. सतबीर बेदी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई), विजय पाल सिंह सदस्य राज्यसभा, रोहित पाठक सदस्य डीपीएसजी सोसायटी, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व अभिभावकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में इनवोकेशन ग्रुप ने अपनी मनोहर व आकर्षक प्रस्तुति के साथ देवी भवानी को नृत्यांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में डाॅ. सतबीर बेदी ने कहा कि, भारत न केवल अपनी संस्कृति- उच्च संस्कारों से समस्त विश्व को चमत्कृत करता रहा है बल्कि यहाँ के वीरों के कारनामे असंभव को संभव करने के लिए भी प्रेरित करते
रहे हैं।

रोहित पाठक ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों में भाग लेकर विद्यार्थी स्वतः देशभक्ति, निर्णय लेने की क्षमता जैसे मूल्यों की प्राप्ति कर लेते हैं। ये विद्यार्थी भविष्य में देश का जागरूक नागरिक बनकर राष्ट्र-धर्म के प्रति प्रेम, सत्य का प्रसार करेंगे। देश भक्ति हमारी संस्कृति का अमूल्य खजाना है। आज के बच्चे अपने भीतर नैतिक गुणों का समावेश करके, आवश्यकता पड़ने पर समाज की नकारात्मक शक्तियों का विनाश करके समाज में सत्य, सच्चत्रिता का वातावरण विकसित करें, यही कामना है। बच्चों को ईमानदारी, नियमों का पालन, कर्तव्य परायणता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेनी होगी।

विजय पाल सिंह ने कार्यक्रम के लिए बधाई देते हुए बच्चों को प्रेरणा लेने की सीख दी। कार्यक्रम में शिवाजी जन्म, ग्रोन अप शिवाजी डांस, विवाहोत्सव, ग्रांड फिनाले आदि नृत्यों की महती भूमिका थी।

 

 

 

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