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बीस रुपए की यह शीशी किसानों के बचा रही है हजारों रुपए, गाज़ियाबाद के जैविक खेती केंद्र ने किया है तैयार

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि केवल बीस रुपए में मिलने वाली सफ़ेद रंग की एक छोटी सी दवाई की शीशी किसानों को लाखों रुपए कमा कर दे रही है। खास किसानों के तैयार इस शीशी वाली दवाई का नाम है वेस्ट डीकम्पोजर और इसे तैयार किया है कमला नेहरू नगर गाज़ियाबाद स्थित राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र ने। वेस्ट डीकम्पोजर का मतलब है कचरे को सड़ागला कर अपघटित करना।

इस ‘वेस्ट डीकम्पोज़र’ की मदद से किसान खेतों की उर्वरकता बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही वे जैविक खाद भी बना सकते हैं। इतना ही नहीं अब उन्हें पराली को भी जलाने की जरूरत नहीं है। ‘वेस्ट डीकम्पोज़र’ के घोल में खेत की बची हुई पराली को मिला कर खाद तैयार की जा सकती है।

राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के डायरेक्टर किशन चंद्रा ने बताया कि पिछले साल से ही ये वेस्ट डीकम्पोज़र किसानों को दिया जा रहे हैं। इस वेस्ट डीकम्पोज़र की सबसे खास बात ये है कि किसान इसे दोबारा अपने खेत में ही तैयार कर सकते हैं और इसका इस्तेमाल करने के बाद उन्हें कोई कीटनाशक प्रयोग करने की जरूरत नहीं है।

ढबारसी में रहने वाले किसान श्रवण तिवारी बताते हैं कि अब खेतों की बची पराली उनके लिए सोना है और ये डीकम्पोज़र अमृत समान है। उन्होंने जब से इस्तेमाल करना शुरु किया है खेत की सेहत बढ़ गई है और फसल में कोई बीमारी नहीं लगती। इस डीकम्पोज़र ने सैकड़ों किसानों को पराली जलाने से रोका है।
इस वेस्ट डीकम्पोज़र को गाय के गोबर और पत्तों में पाए जाने वाले जीवाणु से तैयार किया गया है। इसे इस्तेमाल करने की विधि बहुत ही आसान है। आइए जानते हैं इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं –

  • सबसे पहले इस वेस्ट डीकम्पोज़र को 200 लीटर पानी में 2 किलोग्राम गुड़ के साथ मिलकर इसका घोल तैयार करें और उसे लगभग एक सप्ताह तक ऐसे ही रहने दें।
  • हर दिन इस घोल को किसी लकड़ी के डंडे से दिन में दो बार अच्छे से हिलाएं।
  • एक हफ्ते बाद आप इस घोल का स्प्रे अपने खेतों में कर सकते हैं।
  • स्प्रे के अलावा आप इस घोल को घर के किचन से निकलने वाले कूड़े-कचरे व खेतों में बचने वाली पराली आदि मिला कर खाद भी तैयार कर सकते हैं।
  • इस घोल से ही आप कुछ लीटर घोल अलग निकाल कर और इसमें पानी और गुड़ मिलाकर फिर से घोल तैयार कर सकते हैं। इस तरह से आप एक ही घोल का इस्तेमाल बार-बार कर सकते हैं।

इस वेस्ट डीकम्पोज़र की मदद से खेती की लागत को कम से कम किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल करके किसान बिना किसी रसायन उर्वरक व कीटनाशक के फसल उगा सकते हैं। इससे यूरिया, डीएपी या एमओपी की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

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