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गोल्डन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी अब गाज़ियाबाद में भी, यशोदा अस्पताल में हुआ नई तकनीक से सफल घुटना प्रत्यारोपण

आजकल के बदलती हुई सुस्त लाइफ स्टाइल और युवाओं में बढ़ती ओबेसिटी की समस्या के चलते घुटनों में दर्द की समस्या काफी कम उम्र से ही शुरू हो जाती है। यदि घुटनों में दर्द की समस्या पर शुरुआत में ही ध्यान दे दिया जाए तो यह समस्या व्यायाम और फिजियोथेरेपी से ही ठीक हो जाती है। लेकिन यदि समस्या जटिल हो गई हो तो इसका इलाज है ‘नी रिप्लेसमेंट’, यानी घुटनों का प्रत्यारोपण।
यूं तो गाज़ियाबाद और एनसीआर क्षेत्र के कई अस्पतालों में घुटना बदलने की सुविधाएं उपलब्ध है। मगर नेहरू नगर स्थित यशोदा हॉस्पिटल ने एक नए तरीके के घुटना प्रत्यारोपण में एक नई तकनीक प्रस्तुत की है, जिसे गोल्डन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कहते हैं। अस्पताल के आर्थोपेडिक ट्रामा विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विपिन त्यागी के नेतृत्व में गाज़ियाबाद में इस प्रकार की पहली सर्जरी में एक 57 वर्षीय महिला के दोनों घुटनों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया।

डॉ. विपिन त्यागी ने इस नई तकनीक के बारे में बताते हुए कहा कि, अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले ज़्यादातर नी इंप्लांट्स में लगातार घर्षण के कारण धातु के सूक्ष्म कर्ण निकलते रहते थे, जिससे जोड़ों में सूजन आ जाती थी। इतना ही नहीं इन इंप्लांट्स की वजह से घुटनों में लगातार और बहुत से मामलों में इन्फेक्शन की समस्या भी हो जाती थी जो बहुत खतरनाक है। बहुत से लोगों को मेटल से एलर्जी होती है, इन लोगों के लिए भी प्रचलित नी रिप्लेसमेंट तकनीक कारगर उपाय नहीं है।

डॉ. त्यागी ने बताया कि, गोल्डन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में इस्तेमाल इंप्लांट्स की ऊपरी गोल्डन सतह टाइटेनियम, नियोबियम और विविटनाइट की बनी होती है। यह सतह ट्रांसप्लांट के बेस मटेरियल को मनुष्य के शरीर से दूर रखती है, जिसकी वजह से गोल्डन नी रिप्लेसमेंट पूरी तरह से एलर्जी प्रूफ है। उन्होंने बताया कि, गोल्डन इंप्लांट्स की सतह अत्यधिक चिकनी होने के कारण घर्षण नाममात्र को होता है, जिसकी वजह से इन इंप्लांट्स की उम्र 30 से 35 साल होती है। जबकि साधारण इंप्लांट्स की उम्र 15-20 साल ही होती है। आपको बता दें कि, डॉ. विपिन त्यागी नी रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अग्रणी सर्जन हैं, और यशोदा अस्पताल में अब तक सैकड़ों नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कर चुके हैं।
डॉ. त्यागी ने बताया कि, नई तकनीक द्वारा गोल्डन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद मरीज 15 से 20 दिनों के भीतर ही चलने फिरने लायक हो जाता है। उनके अनुसार, इस पुरानी तकनीक के मुक़ाबले गोल्डन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में आने वाला खर्चा भी मामूली रूप से ज्यादा है। गोल्डन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नेहरू नगर, गाज़ियाबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर से संपर्क कर सकते हैं।

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